JNU में केजरीवाल की बिगड़ी जुबान कहा ‘BJP वाले अपने बाप के भी नहीं’

नई दिल्ली: JNU के लापता छात्र नजीब अहमद की गुमशुदगी पर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल छात्रों के बीच थे। JNU का मंच था सामने छात्र बैठे थे और बगल में कांग्रेस नेता शशि थरूर, मणिशंकर अय्यर समेत दूसरे वाम दल के नेता उपस्थित थे। अपने सामने जमा भीड़ को देखकर केजरीवाल इतने उत्साहित हुए कि नजीब अहमद की गुमशुदगी के मामले को चिंगारी से शोले में बदलने का मंत्र JNU के छात्रों को दे दिया।

केजरीवाल ने छात्रों से कहा कि नजीब अहमद की सलामत वापसी के लिए JNU से निकलकर इंडिया गेट पहुंचना होगा। यानि केजरीवाल छात्रों को इंडिया गेट पर प्रदर्शन करने की सलाह दे रहे थे। इतने पर नहीं रुके केजरीवाल। उन्होंने आगे कहा कि ये बीजेपी वाले अपने बाप के भी नहीं हैं।
केजरीवाल ने कहा जबतक इंडिया गेट पर प्रदर्शन नहीं होगा तबतक सरकार नहीं सुनेगी। नजीब की वापसी लोगों की मदद से हो सकेगी। हम आप सबसे अपील करते हैं आप अपने आंदोलन को कैंपस के बाहर ले जाइये। इंडिया गेट पर धरना दीजिये और समूचे देश से नजीब के लिए संघर्ष करने की अपील कीजिये।

नजीब अहमद के मुद्दे पर JNU पहुंचे केजरीवाल की मंशा थोड़े ही देर में साफ भी हो गई। दरअसल नजीब बहाना था बीजेपी पर निशाना साधना था। केजरीवाल ने कहा गुजरात में पटेल पाटीदार समाज हमेशा बीजेपी को वोट देता था। लेकिन बीजेपी ने इस समाज के युवकों की भी हत्या कराई। ये लोग किसी के भी नहीं हैं। न हिंदू के न मुसलमान के। यहां तक कि ये अपने बाप के भी नहीं हैं। ये सिर्फ वोट की भाषा समझते हैं। उसके लिए कुछ भी कर सकते हैं।

JNU में पढ़नेवावल नजीब अहमद एमएससी बायॉटेक्नॉलजी का छात्र है और वो 15 अक्टूबर से लापता है। नजीब को ढूंढने के लिए JNU में लगातार प्रदर्शन हो रहा है। नजीब की तलाश की भी जा रही है। काफी मुश्किल से नजीब के मुद्दे पर भड़के छात्रों के क्रोध को शांत किया गया था। लेकिन दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने JNU छात्रों को इंडिया गेट पर प्रदर्शन करने की सलाह देकर उस शांत होती चिंगारी में घी डाल दी है। केजरीवाल के इस बयान का समर्थन कांग्रेस नेता शशि थरुर ने भी किया है।

सियासत अपनी जगह है और देशहित अपनी जगह। सभी चाहते हैं नजीब सही सलामत वापस आए। लेकिन क्या उसकी सही सलामत वापसी के लिए जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल सीएम अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी के लिए किया है क्या उसे सही ठहराया जा सकता है। अगर निष्पक्ष होकर कहा जाए तो जवाब ना में ही होगा।

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