भारत बंद तो नहीं हुआ लेकिन सड़क पर दिखा विपक्ष का ‘जन आक्रोश’

नई दिल्ली: नोटबंदी पर सदन के भीतर विपक्ष ने जो एकजुटता दिखाई है सड़क पर उसमें दरार आ गई। ऐसा इसलिए क्योंकि नोटबंदी के खिलाफ जिस भारत बंद का एलान किया गया था सड़क पर कई विपक्षी दलों ने उस भारत बंद से खुद को अलग कर लिया। 28 नवंबर को भारत बंद करने के बदले कांग्रेस ने जन आक्रोश दिवस के रुप में मनाने का फैसला किया था।

पश्चिम बंगाल में भी विरोध तो नोटबंदी का हो रहा था। लेकिन लेप्ट और टीएमसी के विरोध का तरीका अलग अलग था। लेप्ट भारत बंद का समर्थन करते हुए सड़कों पर उतरा तो वहीं ममता बनर्जी की टीएमसी भारत बंद से पहले ही खुद को अलग कर चुकी थी। और टीएमसी की तरफ से जन आक्रोश मार्च निकाला गया। जिसमें सीएम ममता बनर्जी ने कहा लोगों के पास खाना खाने के लिए पैसे नहीं हैं और पीएम लोगों से मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने के लिए कह रहे हैं। ममता बनर्जी ने कहा कि क्या लोग मोबाइल फोन खाएंगे।

वहीं सदन के भीतर विपक्षी सांसदों का विरोध आज भी जारी रहा। दोनों सदनों में हंगामा होता रहा। जिसके चलते सदन की कार्यवाही स्थगित भी करनी पड़ी। विपक्ष की मांग है कि नोटबंदी पर प्रधानमंत्री सदन में बयान दें। विपक्ष की इस मांग के जवाब में गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा अगर जरुरत हुई तो प्रधानमंत्री बहस में हिस्सा लेंगे। लेकिन इसके बाद भी विपक्ष का गुस्सा शांत नहीं हुआ।

जेडीयू, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी ने पहले ही एलान कर दिया था कि वो भारत बंद के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने खुद को इससे अलग कर लिया। जिसका नतीजा ये हुआ कि 28 नवंबर के दिन केवल वाम दल ही भारत बंद के समर्थन में रह गया। केरल, पटना, कोलकाता में वामदल के समर्थक सड़क पर तो दिखे लेकिन जिस भारत बंद का एलान किया गया था उसका कोई खास असर देखने को नहीं मिला।

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