गुजरात CM पर घूस के आरोप पर पेश सबूत हैं जीरो, पक्के सबूत लाओ- SC

नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी के गुजरात के सीएम रहते उनपर सहारा और बिरला ग्रुप से घूस लेने के कथित तौर पर आरोप लगाए गए थे। इससे जुड़ी एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी और इस मामले में जांच कमेटी बनाने की मांग की गई थी। याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा सबूत के तौर पर जो चीजें प्रस्तुत की गई हैं वो जीरो, झूठी और विश्वास न करने योग्य हैं।

गौरतलब है कि वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में आयकर विभाग द्वारा जब्त किये कागजात पेश किये थे। दस्तावेज आयकर विभाग ने सहारा और बिरला ग्रुप के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान जब्त किये थे। प्रशांत भूषण ने कोर्ट को बताया था कि ये कागजात उन्हें किसी विस्लब्लोअर ने दिये थे। प्रशांत भूषण ने ये कागजात कॉमन कॉज नाम के एनजीओ को दे दिये थे। एनजीओ की तरफ से ही जनहित याचिका दायर की गई थी। जिसके मुकदमे की पैरवी प्रशांत भूषण कर रहे थे।

याचिका पर सुनवाई के दौरान सीज किये गए वही दस्तावेज कोर्ट के सामने रखे गए थे। जिसपर कोर्ट ने कहा ‘सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के मुताबिक सहारा ग्रुप के पास से सीज किये गए कागजात फर्जी हैं। हमलोग उनके दम पर जांच के आदेश नहीं दे सकते।‘ याचिका पर सुनवाई कर रही बेंच ने आगे कहा ‘हमें मामले पर सुनवाई करने में कोई दिक्कत नहीं है लेकिन हमारे सामने ठोस सबूत भी होना चाहिए। बिरला और सहारा के पास से मिले सबूत कुछ नहीं हैं। ये दोनों जीरो हैं। आपको पक्के सबूत लाने चाहिए।‘

सुनवाई कर रही बेंच ने प्रशांत भूषण को 14 दिसंबर तक का वक्त देते हुए कहा अगर आपको कुछ नहीं मिलता तो अपनी याचिका वापस ले लीजियेगा। एनजीओ इस मामले में एसआईटी गठन की मांग कर रहा था।

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल भी इसी कागजात के आधार पर पीएम मोदी पर निशाना साध चुके हैं। केजरीवाल ने पीएम पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा के आपात सत्र में कहा था कि आदित्य बिरला ग्रुप के एक्जीक्यूटिव प्रेसिडेंट के पास से बरामद 2012 के मैसेज से पता चला कि उसने तत्कालीन गुजरात के सीएम को पैसे दिये थे। उस मैसेज में ‘गुजरात सीएम 25 करोड़’ लिखा था।

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