अमेरिका को टक्कर देनेवाले क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो का निधन

नई दिल्ली: क्यूबा के क्रांतिकारी नेता और पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो का 90 साल की उम्र में निधन हो गया। उनके भाई और राष्ट्रपति राउत कास्त्रो ने उनके मौत की पुष्टि की। कास्त्रो काफी दिनों से बीमार चल रहे थे। 2008 में उन्होंने अपनी स्वेच्छा से राष्ट्रपति का पद छोड़ दिया था।

कास्त्रो का जन्म एक संपन्न परिवार में हुआ था। हवाना यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करते हुए उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। जिसके बाद वो क्यूबा की राजनीति में मान्यता प्राप्त व्यक्ति बन गए। उनका जीवन फुल्गेंकियो बतिस्ता शासन और संयुक्त राज्य अमेरिका का क्यूबा के राष्ट्रहित में राजनीतिक और कारपोरेट कंपनियों के प्रभाव का आलोचक रहा।

तकरीबन 50 साल तक क्यूबा पर राज करनेवाले फिदेल कास्त्रो को सबसे बड़े कम्युनिस्ट नेता में शामिल किया जाता था। शीतयुद्ध के दौरान सोवियत सेना को अमेरिका के खिलाफ अपनी सीमा में मिसाइल तैनात करने की मंजूरी देकर कास्त्रो दुनियाभर में चर्चा में आ गए।

1959 से 2008 तक क्यूबा के राष्ट्रपति रहे फिदेल कास्त्रो के बारे में कहा जाता है अमेरिका ने उन्हें 638 बार मारने की कोशिश की थी। कास्त्रो की सुरक्षा में तैनात फैबियन ऐस्कलांटे ने ये दावा किया था। अमेरिका की इस कोशिश में सिगार में ब्लास्ट से लेकर फाउंटेन पेन तक का इस्तेमाल किया गया था।

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