विज्ञापन से जो न हुआ वो काम नोटबंदी से हुआ, सिगरेट की बिक्री 40 फीसदी घटी

नई दिल्ली: कैंसर और दिल की बीमारी की एक बड़ी वजह सिगरेट का सेवन है। लोग सिगरेट का सेवन न करें इसके लिए उसके पैकेट पर जागरुकता वाले विज्ञापन छापने के आदेश दिये गए। इल्क्ट्रॉनिक मीडिया में भी सिगरेट का सेवन छोड़ने के लिए विज्ञापन जारी किये जाते हैं। लोग उन विज्ञापनों को देखते भी हैं लेकिन ये सोचकर कि उन्हें कुछ नहीं हो सकता सिगरेट का सेवन जारी रखते हैं।

सरकार और सिगरेट कंपनियों की तरफ से जारी विज्ञान ने जो काम नहीं किया वो काम कर दिखाया सरकार के नोटबंदी के फैसले ने। नोटबंदी लागू होने के बाद से सिगरेट की बिक्री में तकरीबन 40 फीसदी की गिरावट आई है। सिगरेट बेचनेवाले कई दुकानदारों का मानना है कि इसकी एक बड़ी वजह है खुले पैसे की कमी। खुले पैसे ना ग्राहक के पास हैं ना दुकानदार के पास।

दुकानदारों का कहना है कि नोटबंदी लागू होने के बाद से थोक कारोबारी भी उन्हें उधार नहीं दे रहे हैं। ऐसे में जब कोई ग्राहक उधार में सिगरेट मांगता है तो उन्हें मना करना पड़ता है। क्योंकि अगर उधार देंगे तो दुकान में दोबारा सामान लाना मुश्किल हो जाएगा। इसका एक सुखद नतीजा ये हो रहा है कि लोग बगैर सिगरेट के ही दिन गुजार रहे हैं।

कई लोगों का मानना है कि वो काफी दिनों से सिगरेट छोड़ना चाहते थे। लेकिन इच्छाशक्ति की कमी की वजह से इसे छोड़ नहीं पा रहे थे। लेकिन अब चुकी खुले पैसे हैं नहीं और दुकानदार उधार दे नहीं रहा है इसलिए कई दिन बिना सिगरेट के सेवन के ही गुजार दिये। कुछ ऐसे भी लोग हैं जो इसलिए खुश हैं कि नोटबंदी से दूसरी परेशानी भले ही हुई लेकिन उनकी सिगरेट पीने की लत छूट गई।

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