बहुत बड़ा खतरा- जर्सी गाय की ‘पाद’ से ओजोन लेयर में हो जाएगा छेद-रिसर्च

नई दिल्ली: पर्यावरण को लेकर किये गए एक रिसर्च में सामने आया है कि पश्चिमी जर्सी गाय से पर्यावरण को ज्यादा खतरा है। वैज्ञानिकों ने अपने रिसर्च में कहा है कि देसी गाय पर्यावरण के लिए खतरा नहीं है जबकि पश्चिमी जर्सी गाय से पर्यावरण को गंभीर खतरा है। गुजरात के जामनगर के आर्युवेद यूनिवर्सिटी के रिसर्च में ये बात सामने आई है। रिसर्च में ये बात निकलकर सामने आई है कि ग्लोबल वार्मिंग के लिए जर्सी गाय खतरा हैं।

गायों की डकार और पाद से पर्यावरण पर पड़नेवाले असर की जांच की जिम्मेदारी डॉ. हितेश जानी को सौंपी गई थी। रिसर्च की रिपोर्ट में डॉ. हितेश जानी ने कहा कि पश्चिमी देशों की गाय ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार हैं।

पंचगव्य चिकित्सा: सदी की दवा में लिखा गया है कि ‘भारत में हम देसी गायों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते। वहीं पश्चिमी जर्सी गाय दिनभर खाती-पीती रहती हैं। वह ज्यादा बीमार होती हैं बीमारी से बचाने के लिए उन्हें ऐंटीबायोटिक की काफी दवा दी जाती है। इन गायों के पाद में मीथेन गैस निकलती है जिससे ओजोन लेयर में छेद हो रहा है। रिसर्च की रिपोर्ट में पश्चिमी गायों के मुकाबले देसी गायों को सुरक्षित बताया गया है।

रिसर्च के रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘पश्चिमी गायों का ए-1 दूध कई बीमारियों की वजह बनता है। वहीं ए-2 देसी गायों का दूध कई बीमारियों में दवाई जैसा काम करता है। ए-1 दूध में एमिनो ऐसिड होते हैं जो इंसान के अंदरूनी अंगों के साथ रिएक्ट करते हैं।‘ न्यूजीलैंड के एक वेटनरी वैज्ञानिक के मुताबिक यह दूध मधुमेह, दिल से जुड़े रोग, ऑटिस्म जैसी बीमारियों का कारण बनता है।

वहीं रिसर्च रिपोर्ट में यह भी लिखा गया है कि देसी गायों का ए-2 मिल्क स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। इसमें कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो हमारे प्रतिरोधक तंत्र को मजबूत बनाते हैं।

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