4 घंटे लाइन में रहे फिर ‘बैंकबाबू’ ने भर दी इम्तियाज की झोली

नई दिल्ली: 500 और 1000 रुपये को बंद किये 11 दिन बीत गए। लेकिन एटीएम और बैंक के बाहर लोगों की लाइन खत्म नहीं हुई। दिल्ली से लेकर देवगिरी तक और चेन्नई से लेकर चंदौली तक बैंकों के बाहर लोगों की कतार लगी है। मिनट की गिनती से इंतजार शुरु होता है और घंटों में बदल जाता है।

imtyaz-coin-2घंटे के भीतर जो बैंक से छुट्टी पा जाए समझो चारो धाम की यात्रा का पुण्य उसके नसीब में लिखा था। वरना लोग तो पैसे निकालने के साथ साथ लंच और पानी का इंतजाम करके बैंक के बाहर सुबह हाजिर हो रहे हैं और दोपहर बाद ही छुट्टी पा रहे हैं। दिल्ली के इम्तियाज भी पैसे निकालने वालों की उसी कतार में खड़े थे।

दिल्ली के जसोला में रहते हैं इम्तियाज। ऑफिस के काम से गोवा जाना था। पैसों की सख्त जरुरत थी। इसलिए बैंक के बाहर लाइन में लग गए। 20 हजार रुपये निकालने थे। आज के हिसाब से रकम बड़ी थी। इसलिए लाइन में चार घंटे तक इंतजार करते रहे। इंतजार के सिवाय कोई चारा नहीं था।

पब्लिक रिलेशंस कंपनी में काम करते हैं इम्तियाज। जसोला के जामिया को ऑपरेटिव बैंक में पैसे लेनेवालों की कतार में चार घंटे तक खड़े रहे। जब इनकी बारी आई तो बैंकबाबू के सवाल सुनकर परेशानी और बढ़ गई। लेकिन अब इतनी हिम्मत नहीं बची थी कि दोबारा लाइन में लगें। इम्तियाज की मनोदशा का अंदाजा उनकी बातों से लगाया जा सकता है ‘मैं चार घंटे तक बैंक में लाइन में लगा हुआ था। बैंक में कैश की कमी हो गई थी। बैंक मैनेजर ने मुझसे पूछ लिया कि क्या मैं 10-10 रुपये के सिक्के में भुगतान ले सकता हूं।मैंने सोचा लाइन में फिर से खड़े होने से अच्छा है कि सिक्कों में ही पैसे निकाल लूं। मुझे ऑफिस के काम से गोवा जाना था और इसके लिए पैसे निकालना बहुत ज्यादा जरुरी था। मैं मैनेजर से लगातार अनुरोध करता रहा जिसके बाद उन्होंने मेरे सामने यह पेशकश रखी थी। बैंक मैनेजर ने बताया कि आरबीआई से बहुत ही कम पैसा बैंक में आ रहा है। उन्होंने मुझसे सिक्कों में 20 हजार रुपये लेने के लिए पूछा तो मैंने झट से हां कर दी। 15 मिनट में मेरे पास सिक्के आ गए। सिक्कों का वजन हुआ 15 किलो। मैंने सिक्कों को बैग में रखा कंधे पर बैग टांगकर घर वापस आ गया।‘

imtyaz-coin-3इम्तियाज घर से ये सोचकर निकले थे कि नोटों की किल्लत के इस दौर में बैंक से भी छोटे नोट ही मिलेंगे। लेकिन इस बात की कल्पना नहीं की थी कि नोट की इतनी किल्लत हो जाएगी कि उसकी जगह सिक्के खनकने लगेंगे। जिस दस रुपये के सिक्के को इम्तियाज अपने बच्चों को गुल्लक में जमा करने दे दिया करते थे। उन्हीं सिक्कों को आज कंधे पर लादकर घर तक पहुंचे और घर से गोवा तक का सफर भी इन्हीं 10-10 रुपये के सिक्के के भरोसे तय करना था।

इम्तियाज भी खुद को इसके लिए तैयार कर चुके थे कि अंजाम चाहे जो हो, मुश्किल चाहे जितनी भी आए लेकिन भला हो उस बैंकबाबू का भी जिसने चार घंटे लाइन में खड़े रहने के बाद मेरी झोली भर दी। करेंसी नोट से न सही सिक्कों की खनकती आवाज से ही सही।

Loading...

Leave a Reply