रेलवे ने टिकट बुक कराने का 50 साल पुराना नियम बदल दिया




नई दिल्ली: रेलवे ने मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों में टिकट बुक कराने का अपना 50 साल पुराना नियम बदल दिया है। इसके तहत डिस्टेंट रिस्ट्रिक्शन रुल को खत्म कर दिया है। जिसके बाद अब लंबी दूरी की मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में भी किसी भी दूरी का टिकट बुक कराया जा सकेगा। अबतक नियम ये था कि लंबी दूरी की मेल या एक्सप्रेस ट्रेनों में 160 से कम और स्लीपर क्लास के लिए 400 किलोमीटर से कम के सफर के लिए टिकट नहीं दिये जाते थे।

रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए 1968 में ये नियम लागू किया था। रेलवे का तर्क था कि कम दूरी का टिकट देने से लंबी दूरी का सफर करनेवालों के लिए परेशानी हो सकती है। कम दूरी का टिकट बुक होने की वजह से लंबी दूरी का टिकट लेनेवालों को बर्थ नहीं मिल पाती है। इसके लिए रेलवे की तरफ से सभी जोन को अधिकार दिये गए थे कि वे अपने अपने जोन में ट्रेनों में जरुरत के मुताबिक इस नियम के तहत स्टेशन की पहचान कर उनके लिए न्यूनतम दूरी के टिकट देने पर रोक लगा सकते हैं।

लेकिन अलग अलग जोन की तरफ से ट्रेन की क्लास और दूरी अलग अलग तय की गई थी। इस बारे में यात्रियों की तरफ से भी शिकायत की जाती थी कि लंबी दूरी की ट्रेनों में बर्थ खाली रहने पर करंट काउंटर से किसी भी स्टेशन के लिए टिकट दिया जाता है तो फिर एडवांस रिजर्वेशन में ये सुविधा क्यों नहीं दी जाती। इसके बाद रेलवे ने पुराने नियम को खत्म कर दिया। अब किसी भी ट्रेन में कितनी भी दूरी के लिए सीट या बर्थ बुक कराया जा सकेगा।

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