UN में नवाज शरीफ ने अपने भषण में अपनी ही पोल खोल दी

दिल्ली: नफरत की जमीन पर पाकिस्तान ने आतंक की जो फसल बोई है प्रधानमंत्री नवाज शरीफ संयुक्त राष्ट्र महासभा में आतंक की उसी पैदावार का लेखा जोखा रख रहे थे। संयुक्त राष्ट्र के मंच पर नवाज शरीफ ने 19 मिनट का भाषण दिया जिसमें 8 मिनट के भाषण में केवल कश्मीर, बुरहाव वानी और पाकिस्तान के फरेब और झूठ का जिक्र था।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से हिजबुल आतंकी बुरहान वानी को एक कश्मीरी नेता बता रहे थे। शरीफ के चेहरे पर पड़ा शराफत का चोला उस वक्त पूरी तरह से बेनकाब हो गया जब उन्होंने कहा बुरहान वानी की मौत के बाद से कश्मीर में सैंकड़ों निर्देश लोगों को मारा गया। नवाज ने अपने ही भाषण में कहा भारत और पाकिस्तान के बीच अब तक शांति की बहाली नहीं हो सकती है जबतक कश्मीर समस्या को नहीं सुलझाया जाता है।

नवाज ने कहा कश्मीर के युवा आजादी चाहते हैं, और बुरहान वानी कश्मीरियों का नेता बनकर उभरा था। जिस झूठ के बहीखाते को नवाज संयुक्त राष्ट्र के मंच पर पढ़ रहे थे उसे पढ़ने में उन्हें इस बात का भी खयाल नहीं रहा कि वो एक प्रधानमंत्री हैं। किसी आतंकी संगठन के सरगना नहीं। क्योंकि बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद पाकिस्तान की सड़कों पर जमात उद दावा प्रमुख हाफिज सईद ने भी उसी तरह से अपना कलेजा पीटा था जैसे कि नवाज शरीफ पीट रहे हैं। हाफिज सईद ने भी उसी तरह से बुरहान वानी को एक नेता बताया था जैसे कि नवाज शरीफ बता रहे हैं। हाफिज सईद भी उसी तरह से भारत पर मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाता था जैसे कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ लगा रहे हैं।

जब दोनों में इतनी समानताएं हैं तो फिर एक आतंकी देश के प्रधानमंत्री और आतंकी संगठन के मुखिया में फर्क ही क्या रह गया। क्या यहां पर ये कहना गलत होगा कि संयुक्त राष्ट्र में जिस दस्तावेज को पाकिस्तनी प्रधानमंत्री पढ़ रहे थे उसे लिखा आतंकी हाफिज सईद ने था, पाकिस्तानी सेना ने उसपर रजामंदी की मुहर लगाई थी और आईएसआई के एजेंटों ने उसे अपने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ तक पहुंचाया था।

नवाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर में भारत की तरफ से हुए मानवाधिकार उल्लंघन पर एक डोजियर सौंपने की बात भी कही। ये सबकुछ उसी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कह रह रहे थे जिसे आतंकी देश घोषित करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस में प्रस्ताव रखा गया है। जिसपर 90 दिनों में राष्ट्रपति ओबामा फैसला लेंगे। उसी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री हैं नवाज शरीफ जिसे बगैर नाम लिये मंगलवार को राष्ट्रपति ओबामा ने आतंकियों को पनाह देने से सख्त लहजे में मना किया था। उसी पाकिस्तान के नवाज शरीफ को कश्मीर की चिंता सता रही है। जबकि उसी पाकिस्तान में कितने आतंकी भरे पड़े हैं और पाकिस्तान अबतक अपनी सरजमीं पर कितने आतंकियों को ट्रेनिंग दे चुका है इसकी गिनती अगर शुरु की जाए तो गिनती के उस आंकड़े को दर्ज करने के लिए शायद कागज कम पड़ जाएं। उसी पाकिस्तान के बलूचिस्तान से रोजाना आजादी की आवाज बुलंद हो रही है। बलूचिस्तान में आजादी का मांग करनेवाले आंदोलनकारियों को पाकिस्तान सेना पहले अगवा करती है फिर उनकी हत्या कर दी जाती है। क्या ये मानवधिकार का उल्लंघन नहीं है।

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