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इस तरह गोपनीयता की शपथ लेकर दो कमरों में नोटबंदी की तैयारी करते थे अफसर

इस तरह गोपनीयता की शपथ लेकर दो कमरों में नोटबंदी की तैयारी करते थे अफसर




नई दिल्ली: 8 नवंबर को नोटबंदी का एलान किया गया। केंद्र सरकार के इस फैसले से हर कोई हैरान हुआ था। सभी ये सोच रहे थे कि आखिर सरकार ने इतने बड़े फैसले की तैयारी में इतनी गोपनीयता कैसे रखी। दरअसल इस काम के लिए उन अफसरों की चयन किया गया था जो लाइमलाइट से दूर हैं और जिनके बारे में ज्यादा किसी को जानकारी नहीं है।

इसके लिए रेवेन्यू सेक्रेटरी हसमुख अढिया समेत 6 लोगों की एक टीम बनी थी। ये अफसर सारा काम पीएम मोदी के घर पर ही करते थे। काम शुरु करने से पहले इन अफसरों को गोपनीयता की शपथ भी दिलाई गई थी।

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक हसमुख अढिया समेत पांच अफसरों का चयन काफी सोच विचार के बाद किया गया था। ये वो अफसर थे जिन्हें इस मामले की पूरी समझ थी। मोदी के घर के दो कमरे में पूरी नोटबंदी की तैयारी की गई। जानकारी ये भी मिल रही है कि नोटबंदी की ये सारी तैयारी तब शुरु की गई थी जब 2014 में मोदी प्रधानमंत्री बने थे।

इसके लिए एक साल तक केवल रिसर्च का काम किया गया। इस महा मिशन में जुटे अफसर आपस में और पीएम मोदी से गुजराती में भी बात करते थे। सितंबर 2015 में हसमुख अढिया को रेवेन्यू सेक्रेटरी बनाया गया था। जिसके बाद वो वित्त मंत्री अरुण जेटली को रिपोर्ट करते थे। अढिया के लिए ये वो मकाम था जहां से वो सीधी पीएम मोदी से संपर्क कर सकते थे। दोनों को जब भी किसी मुद्दे पर बातचीत करनी होती थी तो वो गुजराती में भी बात करते थे।

पीएम के एक करीबी ने न्यूज एजेंसी को बताया कि पिछले एक साल से ज्यादा वक्त से पीएम मोदी, वित्त मंत्रालय के अफसर और आरबीआई की टीम करप्शन और काला धन के मुद्दे पर काम कर रही थी।

इस पूरे नोटबंदी की सबसे बड़ी बात ये है कि पीएम मोदी ने नोटबंदी लागू करने से पहले कैबिनेट की बैठक बुलाई। उस बैठक में मोदी ने कहा ‘अगर नोटबंदी की पॉलिसी फेल हुई तो इसकी पूरी जिम्मेदारी मेरी होगी।‘

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