बिहार के नालंदा विश्वविद्यालय को मिला GRIHA अवॉर्ड

नालंदा/बिहार:  भारत और खास तौर से बिहार के गौरव का प्रतीक बन चुके नालंदा विश्वविद्यालय को अपने इको फ्रेंडली परिसर के लिए एक बार फिर GRIHA काउंसिल ने सम्मानित किया है। कुलपति प्रोफेसर सुनैना सिंह के कुशल नेतृत्व में प्रकृति की गोद में इस अद्वितीय परिसर को तैयार किया जा रहा है। इस परिसर में जिस निरंतरता के साथ निर्माण और विकास कार्य किए जा रहे हैं उससे ये लगने लगा है कि आने वाले दिनों में परिसर में पढ़ने और काम करने वालों के साथ- साथ यहां आने वाले आगंतुकों को काफी आरामदायक माहौल मिलेगा। कुलपति प्रोफेसर सुनैना सिंह के अथक प्रयास से नेट जीरों की अवधारणा वाले इस विश्वविद्यालय परिसर को GRIHA काउंसिल (ग्रीन रेटिंग फॉर इंटीग्रेटेड हैबिटेट असेसमेंट) ने GRIHA एल डी मास्टर प्लान 5 स्टार रेटिंग से सम्मानित किया है।
GRIHA काउंसिल ने ऑन लाइन GRIHA समिट में नालंदा विश्वविद्यालय को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया। इससे पहले भारत के माननीय उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने ऑन लाइन इस 12वें GRIHA समिट का उद्घाटन किया। इस मौके पर केंद्रीय आवास और शहरी मामलों और नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री हरदीप सिंह पूरी, वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री सोम प्रकाश मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद रहे। नालंदा विश्वविद्यालय के लिए कुलपति प्रोफेसर सुनैना सिंह की तरह से स्कूल ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज के डीन प्रोफेसर सुखबीर सिंह, और विश्वविद्यालय प्रोजेक्ट के नोडल ऑफिसर, रिटायर्ड इंजीनियर-इन-चीफ,  गिरीशनंदन सिंह ने इस पुरस्कार को प्राप्त किया । यह कार्यक्रम 16 दिसम्बर 2020 को सम्पन्न हुआ था।
नालंदा विश्वविद्यालय परिसर का निर्माण जल, ऊर्जा और अपशिष्ट प्रबंधन के लिए एक अनोखी योजना के साथ किया जा रहा है, ताकि अनिवार्य रूप से हर स्तर पर पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और उसकी निरंतरता बरकरार रखी जा सके। अत्याधुनिक तरीके से विकसित किए जा रहे इस परिसर में यहां पढ़ने और काम करने वालों के लिए आरामदायक माहौल तैयार किया जा रहा है साथ ही यहां इस बात का भी खास ख्याल रखा जा रहा है कि इस परिसर में पर्यावरण को कोई नुकसान पहुंचाए बिना भरपूर ऊर्जा उपलब्ध हो। इसी सोच के साथ नेट जीरो अवधारणा का जन्म हुआ। नेट जीरो परिसर तैयार करने के लिए नेट जीरो ऊर्जा, नेट जीरो जल, नेट जीरो अपशिष्ट, और नेट जीरो उत्सर्जन की योजना तैयार की गई है। विश्वविद्यालय परिसर को बेहद अनोखे तरीके से जल और ऊर्जा व्यवस्था तैयार करके नेट जीरो परिसर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए बेहद नए तरीके से उन्नत तकनीक की मदद से जल और ऊर्जा संरक्षण की योजना तैयार की गई है। जिन उन्नत तकनीकों की मदद से विश्वविद्यालय परिसर को नेट जीरो परिसर के तौर पर विकसित करने की योजना बनाई गई है उनमें से कुछ खास हैं
भवन को ठंडा/गर्म रखने के लिए डेसिकैंट इवापोरेटिव (DEVAP) प्रौद्योगिकी का प्रयोग
एचवीएसी (HVAC) के लिए सौर एकीकृत तापीय भंडारण प्रौद्योगिकी, स्मार्ट एलईडी (LED) लाइटिंग धारिता सेंसर के साथ DALI एकीकरण,
सामान्य जली मिट्टी की ईंट के बजाय कंप्रेस्ड स्टेबलाइज्ड अर्थ ब्लॉक (CSEB) का प्रयोग
भूकम्पीय स्थिरता प्राप्त करने के लिए चिनाई के एकीकृत बॉक्स (Box) का प्रयोग
तापीय प्रतिरोधकता को बढ़ाने के लिए मोटी कैविटी वाल (Cavity wall) का प्रयोग
पेय जल की मांग को पूरा करने के लिए जलवायु उपयुक्त भूदृश्य का अभिकल्पन, डीसेंट्रलाइज्ड वाटर ट्रीटमेंट सिस्टम (DeWAT)
प्रभावी जल प्रबंधन के लिए रणनीति
बायोगैस संचालित कंबाइंड हीट एंड पावर (CHP) इंजन सोलर पीवी (PV) कैप्टिव ऊर्जा संयंत्र चयनित नेटिव प्लांट्स के द्वारा हवा की शीतलता एवं स्वच्छता
स्वचालित अप्रोच स्कैडा (SKAIDA)/स्मार्ट ग्रिड(Smart Grid), आईबीएमएस
(IBMS), पीएलसी (PLC) इत्यादि का प्रयोग

स्वदेशी और नई तकनीक के समावेश से सभी आयामों में तैयार ये हाइब्रिड अवधारणा अन्य आगामी परियोजनाओं / परिसरों और सामुदायिक निर्माण मॉडल के लिए एक उदाहरण स्थापित कर सकता है।

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