अखिलेश के अमर अंकल का पार्टी में प्रमोशन मतलब चचा शिवपाल की चल पड़ी

दिल्ली: हफ्ता भी नहीं हुआ है जब मुलायम परिवार में चचा शिवपाल और भतीजे अखिलेश के बीच जंग दिल्ली से लेकर लखनऊ तक चली। अखिलेश ने उस लड़ाई में किसी बाहर वाले की भूमिका बताई थी। अखिलेश जिसे बाहरवाला बता रहे थे दरअसल वो बाहरवाला भीतरवाले यानि चचा शिवपाल के करीबी हैं और पिता मुलायम के उस वक्त के सहयोगी हैं जब मुलायम ने समाजवादी पार्टी खड़ी की थी और अखिलेश निक्कर में घूमा करते थे। उस बाहर वाले का नाम है अमर सिंह। अब उस अमर सिंह का प्रमोशन हो चुका है और वो पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बन गए हैं।

समाजवाद के चचा- भतीजे में जब सुलह हो गई तो एक पिता और एक भाई की भूमिका निभा रहे मुलायम ने भी राहत की सांस ली। सोचा जो हुआ सो हुआ लेकिन इस लड़ाई का अंत खुशगवार रहा। कोई किसी से बिछड़ा नहीं, कोई किसी से निराश नहीं है मतलब समाजवाद के सांजे में सब पहले की तरह फिट बैठे हैं।

इस लड़ाई में शिवपाल का भी कद बढ़ा, पार्टी और सरकार दोनों में। पहले उनके पास अखिलेश की कैबिनेट में 9 मंत्रालय हुआ करते थे अब 13 आ गए। पहले समाजवादी पार्टी के यूपी अध्यक्ष सीएम अखिलेश हुआ करते थे लेकिन अब वो पद शिवपाल के पास आ गया।

मतलब ये की मुलायम सिंह यादव ने पार्टी की बागडोर बेटे अखिलेश के हाथों से लेकर अपने भाई शिवपाल के हाथों में थमा दी। क्योंकि लोकसभा चुनाव में अखिलेश के भरोसे पार्टी रही थी लेकिन हिस्से में आई केवल पांच सीटें। अगर विधानसभा चुनाव में ऐसा हो जाता तो क्या होता आप खुद सोच लीजिये।

यूपी में जब पार्टी की कमान शिवपाल यादव ने संभाली तो 24 घंटे के भीतर 7 नामों को निपटा दिया। बताया जाता है ये सातों नाम सीएम अखिलेश के करीबी हुआ करते थे। वहीं जिस अमर सिंह को सीएम अखिलेश बाहर वाला बताकर सारी फसाद की जड़ बता रहे थे शिवपाल उन्हें अपना हमदर्द बताते रहे थे । जब चचा भतीजे की लड़ाई में शिवपाल का कद बढ़ा तो उन्होंने अपने परम मित्र अमर सिंह का भी कद बढ़ा दिया। और उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बना दिया है।

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