मुलायम के अमर प्रेम पर दु:खी हो गए आजम !

मुलायम के अमर प्रेम पर दु:खी हो गए आजम !

मंगलवार को राज्यसभा के लिए समाजवादी पार्टी की तरफ से अमर सिंह के नाम के एलान के साथ ही एक नई राजनीतिक बहस शुरु हो गई। इसबार बहस का मुद्दा ये था कि क्या समाजवादी पार्टी में अमर सिंह पार्ट-2 सभी को स्वीकार होगा। दरअसल इस स्वीकार और तिरस्कार के सवाल और जवाब खासकर समाजवादी पार्टी के ही नेता आजम खान के आसपास घूम रहे हैं। क्योंकि अमर सिंह जिस राजनीतिक अज्ञातवास में सालों से थे उसके पीछे भी आजम खान थे। लेकिन जब उनकी दोबारा पार्टी में वापसी हुई तो आसमान से उतरे किसी फरिश्ते की तरह पार्टी ने उन्हें तवज्जो दी।

अमर सिंह ने जब समाजवादी पार्टी छोड़ी थी तब उन्होंने पार्टी के तमाम पदों से इस्तीफा दे दिया था। लेकिन जब वापसी हुई तो उन्हें सीधे राज्य सभा का टिकट दिया गया। पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव किस तरह से अमर सिंह को दोबारा अपने करीब लाने के लिए बेकरार थे इसका अंदाजा इसी से लगता है कि बगैर पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण कराए ही उनके हाथ में राज्यसभा का पता लिखा लिफाफा थमा दिया गया।

अमर सिंह की पार्टी मे वापसी पर आजम खान ने अपनी आपत्ति जता दी। बेहद ही सधे और शिष्टाचार वाले अंदाज में आजम खान ने कह दिया की अमिर सिंह की वापसी से सहमत नहीं हूं। लेकिन चुकी फैसाल मुलायम सिंह जी ने किया है इसलिए इसे चुनौती नहीं दे सकता। केवल आजम ही नहीं रामगोपाल वर्मा भी अमर सिंह की वापसी से खुश नहीं हैं। लेकिन चुकी फैसला मुलायम सिंह की तरफ से लिया गया है इसलिए इसपर खुलकर कोई विरोध की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। लेकिन इतना तय है कि इतनी आसानी से अमर सिंह सभी समाजवादियों को स्वीकार्य हो जाएंगे इसकी 100 फीसदी उम्मीद नहीं रखी जा सकती।

अमर-आजम की तकरार की कहानी और नजारा आज भी याद है लोगों को। पूरी पार्टी एक तरफ थी और अमर आजम की लड़ाई एक तरफ। हालात इस कदर बन गए की मुलायम सिंह के सामने भी दोनों में से किसी एक को चुनने की नौबत आ गई। तब अमर से ज्यादा फायदेमंद आजम थे इसलिए अमर सिंह राजनीतिक अज्ञातवास में चले गए और आजम समाजवादी पार्टी में बने रह गए। अब एकबार फिर पुरानी तस्वीर सामने आ रही है। जिसमें अमर सिंह हैं…..आजम खान हैं….मुलायम सिंह यादव हैं और समाजवादी पार्टी है। और हां विधानसभा चुनाव भी है । अगर आप ये सोच रहे हैं कि आजम का विरोध महज शिष्टाचार के चंद शब्दों में ही खत्म हो जाएगा तो आप शायद गलत हैं। क्योंकि राजनीति में अपने मुखिया के लिए सम्मान एक तरफ है और अपना विरोध दर्ज कराना एक तरफ। आजम ने फिलहाल वही किया है। जिसमें उन्होंने केवल इशारा किया है कि अमर सिंह उन्हें स्वीकार नहीं हैं। आगे इसमें और अध्याय भी जुड़ेंगे। उसके बारे में भी हम आपको बताएंगे।

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