यूपी में समाजवादी पार्टी के इस गेम में फंस गई पूरी कांग्रेस!




लखनऊ: उत्तर प्रदेश में कभी हां कभी ना होते होते आखिरकार समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन हो गया। इस गठबंधन के बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक साथ रोड शो और प्रेस कांफ्रेंस भी किये। जिसमें एक नया नरा भी दिया गया कि ‘यूपी को ये साथ पसंद है।‘

लेकिन उसके अगले दिन ये खबर आई कि समाजवादी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और अखिलेश के पिता इस गंठबंधन से नाराज हैं। सूत्र यहां तक बता रहे हैं कि मुलायम सिंह यादव उन सीटों पर जहां से कांग्रेसी उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं वहां निर्दलीय उम्मीदवार उतारेंगे। और उन निर्दलीय उम्मीदवारों को मुलायम सिंह यादव समर्थन देंगे। उनके पक्ष में कार्यकर्ताओं से काम करने की अपील करेंगे और जनता से उन निर्दलीय उम्मीदवारों के लिए वोट करने की अपील करेंगे।

यहां पर एक बात समझनेवाली है। जबतक गठबंधन नहीं हुआ था तबतक मुलायम ने इस तरह का रुख नहीं दिखाया था। जब गठबंधन हो गया तब मुलायम ने ये संकेत दिये कि वो इससे खुश नहीं हैं। यहां तक कहा गया कि वो गठबंधन के पक्ष में प्रचार भी नहीं करेंगे। उल्टे ये कह दिया कि जहां कांग्रेस के उम्मीदवार हैं वहां वो अपने उम्मीदवार खड़े करेंगे।

क्या इसके बाद ये माना जाए कि मुलायम का ये नया क्रोध केवल कांग्रेस के लिए है। क्योंकि अबतक उनकी तरफ से ये नहीं कहा गया है कि वो समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों के खिलाफ भी अपने निर्दलीय उम्मीदवार उतारेंगे। हां समाजवादी पार्टी के लिए उन्होंने इतना जरुर कहा है कि पार्टी को वो डूबने नहीं देंगे। तो क्या मुलायम जानबूझकर कांग्रेस को नतीजे से पहले ही कमजोर कर ये सुनिश्तित कर लेना चाहते हैं कि प्रदेश में विधानसभा चुनाव के नतीजे में कांग्रेस इतनी कमजोर हो जाए कि वो किसी तरह के सौदेबाजी करने में समर्थ न हो।

अब पाठकों के मन में सवाल उठ रहा होगा कि आखिर मुलायम अपने ही हाथों उस गठबंधन को कमजोर क्यों करना चाहेंगे जिसमें उनके पुत्र अखिलेश भी शामिल हैं। इसकी बड़ी सीधी सी वजह है। दरअसल मुलायम ने आज की तारीख में समाजवादी पार्ट की विरासत अखिलेश को सौंप दी है। हाल के दिनों में हुए संघर्ष के बाद अखिलेश काफी हद तक अपनी साफ सुथरी छवि को निखारने में कामयाब भी रहे हैं।

समाजवादी पार्टी 298 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। जबकि कांग्रेस 105 सीटों पर। समाजवादी पार्टी की तरफ से ये दावा खुद अखिलेश यादव भी कर चुके हैं कि उनकी पार्टी अपने दम पर सरकार बना लेगी। लेकिन कांग्रेस के साथ गठबंधन कर जीत का आंकड़ा 300 के पार पहुंच सकता है। यानि कांग्रेस की हार से समाजवादी पार्टी पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन अगर कांग्रेस बड़ी जीत हासिल (उम्मीद कम) करती है और अगर प्रदेश में अगली सरकार समाजवादी पार्टी की बनती है तो फिर सरकार में भी अपनी हैसियत के मुताबिक भागीदारी चाहेगी। और इसी भागीदारी का मौका मुलायम कांग्रेस को नहीं देना चाहते। यही वजह है सूत्र ये बता रहे हैं कि अब मुलायम कांग्रेस के उम्मीदवारों के खिलाफ अपने उम्मीदवार उतारने की बात कर रहे हैं।

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