मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, क्या है लोकसभा का गणित

नई दिल्ली:  संसद के मानसून सत्र की शुरुआत अविश्वास प्रस्ताव से हुई। टीडीपी ने लोकसभा में मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया। जिसे अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने चर्चा और वोटिंग के लिए स्वीकार कर लिया। अविश्वास प्रस्ताव पर शुक्रवार को चर्चा और वोटिंग होगी। टीडीपी के इस अविश्वास प्रस्ताव को कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल के समर्थन का दावा किया जा रहा है।

अब चर्चा का विषय ये है कि इस अविश्वास प्रस्ताव का मोदी सरकार की सेहत पर क्या असर पड़ेगा। फिलहाल लोकसभा में जो गणित है उससे तो यही लग रहा है कि इस अविश्वास प्रस्ताव से सरकार चिंतित नहीं है। इसके पीछे वजह है लोकसभा में सीटों का गणित।

लेकिन इस गणित को गड़बड़ाने के लिए विपक्षी पार्टियां उन पार्टियों की तरफ देख रही हैं जो एनडीए में रहते हुए घुटन महसूस कर रही हैं। और वक्त वक्त पर सरकार की निंदा भी करती रही हैं। इसमें शिवसेना भी शामिल है। फिलहाल लोकसभा में शिवसेना के 18 सांसद हैं। और अभी ये साफ नहीं है कि शिवसेना अपने बगावती तेवर अविश्वास प्रस्ताव पर भी दिखाएगी या फिर पुरानी बातों को भूलकर वो सरकार के साथ खड़ी होगी। शिवसेना के रूख पर उद्धव ठाकरे फैसला करेंगे।

अब लोकसभा के गणित को समझ लीजिये। लोकसभा में बहुमत के लिए 272 सांसदों की जरुरत है। लेकिन बीजेपी के पास अकेले ही 273 सांसद हैं। यानि बीजेपी के पास बहुमत से एक ज्यादा सांसद है। लेकिन बीजेपी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा, कीर्ति आजाद और सावित्री बाई फूले बगावती तेवर दिखा चुके हैं। यानि इन सांसदों से भी विपक्ष कृपा की उम्मीद कर सकती है।

545 सांसदों वाले लोकसभा में फिलहाल 535 सांसद हैं। यानि बीजेपी को बहुमत के लिए 268 सांसदों की जरुरत है। अभी उसके पास 273 सांसद हैं। अगर बात बीजेपी के सहयोगी दलों की करें तो शिवसेना के 18, एलजेपी के 6, अकाली दल के 4 और अन्य के 9 सांसद हैं। यानि एनडीए का योग 310 पहुंच रहा है।

गणित मोदी सरकार के पक्ष में है। इसलिए इस बात की उम्मीद ना के बराबर है कि अविश्वास प्रस्ताव से सरकार की सेहत पर कोई असर पड़ेगा। लेकिन इतना जरुर है कि विपक्ष के पास अपनी एकजुटता दिखाने का एक मौका जरुर है।

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