मोदी सरकार का आखिरी सत्र होगा ये मानसून सत्र, 2018 में ही लोकसभा चुनाव?

नई दिल्ली:  संसद का मानसून सत्र 18 जुलाई से शुरु हो रहा है। संसद का ये सत्र सरकार और विपक्ष के लिए काफी मायने रखता है। क्योंकि संसद के बाहर विपक्ष अपनी जिस एकजुटता का दावा कर रहा है अब उसकी एक बानगी सदन के भीतर भी विपक्ष को दिखानी होगी। खैर इस बात का पता तो मानसून सत्र के शुरु होने के बाद ही चल सकेगा।

फिलहाल हम ये बात करते हैं कि क्यों सरकार के लिए मानसून सत्र अहम है। ये अहम इसलिए है क्योंकि ये मानसून सत्र मोदी सरकार के लिए आखिरी सत्र साबित हो सकता है। जिस तरह के सियासी सरगर्मी दिखाई दे रही है उससे ये संकेत भी मिलने लगे हैं कि केंद्र सरकार वक्त से पहले ही लोकसभा चुनाव की सिफारिश कर सकती है।

यानि मानसून सत्र के बाद होनेवाले शीतकालीन सत्र से पहले ही मोदी सरकार आम चुनाव की सिफारिश कर सकती है। मोदी सरकार के कार्याकाल का अब 10 महीना बचा है। यही नहीं बीजेपी शासित चार राज्यों की सरकार का कार्याकाल भी जनवरी 2019 में खत्म हो रहा है। यानि इन चारों राज्यों मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मिजोरम में भी लोकसभा चुनाव के साथ ही चुनाव करवाए जा सकते हैँ।

वैसे भी मोदी सरकार एक देश एक चुनाव की बात करती आ रही है। कई बार इसे लेकर चर्चा भी हो चुका है। मोदी सरकार का कहना है कि अलग अलग वक्त में चुनाव होने से राज्यों में आचार संहिता लगने की वजह से विकास का कार्य प्रभावित होते हैं। अगर एक साथ इनके चुनाव हो जाएंगे तो इससे वक्त और पैसा दोनों की बचत होगी।

हलांकि नवंबर दिसंबर के बाद कई और भी राज्य हैं जिनके कार्यकाल का एक साल ही बचेगा। इनमें हरियाणा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, अरुणाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, सिक्किम, महाराष्ट्र, झारखंड ऐसे ही राज्य हैं। यानि केंद्र सरकार लोकसभा चुनाव और इन 12 राज्यों में विधानसभा चुनाव एक साथ करवा सकती है।

पिछले दिनों शनिवार को मायावती ने भी अपनी प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि केंद्र सरकार इसी साल लोकसभा चुनाव करवाने की तैयारी कर रही है। हलांकि एक देश एक चुनाव की नीति में केंद्र सरकार को कुछ विपक्षी दलों का साथ जरुर मिला है लेकिन कांग्रेस इसके विरोध में है।

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