पीएम मोदी का मास्टर प्लान फाइनल, शनिवार शाम बड़ा धमका

नई दिल्ली:  अगस्त के महीने की आखिरी तारीख ढलान पर थी। सूरज ढल चुका था अंधेरा छाय हुआ था। आसमान की चांदनी छिटक कर धरती तक पहुंच रही थी और अंधेरे के असर को कम कर रही थी। सितंबर के आगमन और अगस्त की विदाई के बीच की घड़ी में दिल्ली से एक के बाद एक हलचल भरी खबर आने लगी। खबर ऐसी थी कि मोदी सरकार के कैबिनेट की शक्ल सूरत बदलने की तैयारी शुरु हो चुकी है। और काम युद्ध स्तर पर चल रहा है।

कौशल विकास मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री तक पहुंचा दिया, दूसरे मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने भी अपना इस्तीफा पीएम तक पहुंचा दिया है। सूत्र बता रहे हैं कि इन दोनों मंत्रियों ने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के कहने पर इस्तीफा प्रधानमंत्री को दिया है। ये दोनों तो वो नाम हैं जिन्होंने अपना इस्तीफा दिया है। लेकिन जिस इस्तीफों की झड़ी की बात यहां की जा रही है इसमें और भी नाम शामिल हैं।

गांगा सफाई का बीड़ा उठने वाली उमा भारती ने अपने इस्तीफे की पेशकश कर दी ही, कलराज मिश्र ने भी अपने इस्तीफे की पेशकश कर दी है। महेंद्र नाथ पांडे और संजीव कुमार बालियान ने भी इस्तीफे की पेशकश कर दी है। रेल मंत्री सुरेश प्रभु पहले ही हादसों के दाग को साफ करने में परेशान हैं। प्रभु ने भी इस्तीफे की पेशकश कर दी है। मेनका गांधी से भी मंत्रालय लिया जा सकता है। कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह का मंत्रालय बदला जा सकता है। विभाग बदलनेवालों में गजपति राजू भी शामिल हैं। जेडीयू की कैबिनेट में एंट्री की पूरी उम्मीद है।

उमा भारती ने खराब सेहत को अपने इस्तीफे की वजह बताई है। लेकिन बताया जा रहा है कि खराब सेहत नहीं बल्कि खराब प्रदर्शन की वजह से उन्होंने इस्तीफे की पेशकश की है और उनकी छुट्टी तय है। उसी तरह से कलराज मिश्र हैं जिनकी उम्र 75 साल को पार कर चुकी है। और मोदी सरकार ने ये तय किया है कि 75 से अधिक की उम्र वाले सांसद मंत्री नहीं बनें।

यानि इस महीने के अगले दो दिनों में मोदी सरकार के कैबिनेट का बिल्कुल बदला हुआ रूप दिखाई देने वाला है। एक तरफ इस्तीफों की झड़ी लगी है तो दूसरी तरफ कई मंत्रियों के मंत्रालय भी बदले जाने की खबर है। रेल चलाने में नाकाम रहे सुरेश प्रभु को एक और मौका मिल सकता है। और उन्हें इसबार रेल छोड़कर पेड़ लगाने और पर्यावरण को साफ सुथरा बनाए रखने के लिए पर्यावरण मंत्रालय दिया जा सकता है।

देशभर में सड़कों का जाल बिछाने वाले नितिन गडकरी को रेल मंत्रालय का जिम्मा दिया जा सकता है। सूत्र बताते हैं कि ये फेरबदल काफी सोच विचार के बाद किया जा रहा है और ये रुटीन फेरबदल नहीं है। सूत्रों के मुताबिक पीएमओ ने सभी मंत्रियों की ऑडिट रिपोर्ट तैयार की है। जिसमें मंत्रियों को उनके कामकाज के आधार पर नंबर दिये गए हैं। इसी रिपोर्ट के आधार पर अगले दो दिनों में होनेवाले कैबिनेट फेरबदल में मंत्रियों को हटाया जा रहा है या उनके विभाग बदले जा रहे हैं। लेकिन ऐसा नहीं है कि केवल मंत्रियों का डिमोशन ही होगा। कई मंत्रियों का प्रमोशन भी किया जाएगा।

इस मंत्रिमंडल विस्तार में 2019 के लोकसभा चुनाव को भी ध्यान में रखा जा रहा है। इसलिए खबर ये मिल रही है कि उन राज्यों के युवा चेहरों को कैबिनेट में जगह दी जा सकती है जहां हाल के दिनों में विधानसभा चुनाव होना है। हिमाचल प्रदेश, गुजरात और राजस्थान उन्हीं राज्यों में शामिल हैं।

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