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माइग्रेन से कैसे करें अपना बचाव और क्यों होता है माइग्रेन ?

माइग्रेन से कैसे करें अपना बचाव और क्यों होता है माइग्रेन ?

माइग्रेन में होनेवाला सिरदर्द आम सिरदर्द से अलग होता है। इसमें मरीज को एक अलग तरह की बेचैनी होती है। आमतौर पर माइग्रेन का दर्द सिर के एक हिस्से में ही होता है।लेकिन कुछ मरीजों को ये सिर के दोनों तरफ होता है। एक बार माइग्रेन शुरु होने के बाद इसका असर 2 घंटे से लेकर 72 घंटे तक रहता है।

माइग्रेन का दर्द आमतौर पर बरसात के मौसम में ज्यादा होता है। क्योंकि इन दिनों में तापमान में काफी ज्यादा बदलाव होता है। माइग्रेन का दर्द जब शुरु होता है तो मरीज को ये एहसास होता है कि सिर पर कोई हथौड़े से वार कर रहा है। उस हालत में मरीज न तो कोई काम ढंग से कर पाता है और न ही आराम। क्योंकि एक बेचैनी लगातार बनी रहती है।

शोध में पता चला है कि मरीज की खोपड़ी में जब खून की नलियां फैल जाती हैं तो उनमें से एक खास कैमिकल का स्राव शुरु हो जाता है। ये कैमिकल तंत्रिका रेसों द्वारा पड़ने वाले दबाव की वजह से निकलते हैं। सिरदर्द के दौरान जब कोई ब्लड वेसल फैल जाती है तो वह नर्व फाइबर्स पर दबाव डालती है। इस दबाव की वजह के कैमिकल रिलीज होते हैं। जिससे ब्लड वेसल में सूजन, दर्द और फैलाव होने लगता है। जिसके बाद शुरु होता है माइग्रेन का दर्द।

कैसे करें माइग्रेन और आम सिरदर्द में फर्क?
माइग्रेन में त्वचा में चुभन और कमजोरी महसूस होती है। इसके अलावे माइग्रेन के दूसरे लक्षण जी मिचलाना, उल्टी होना, लो बीपी होना, रोशनी और आवाज से बेचैनी महसूस करना। आंखों के नीचे डार्क सर्कल्स होना, गुस्सा, चिड़चिड़ापन भी माइग्रेन के लक्षण हैं। मरीज को एक साथ एक से ज्यादा लक्षण भी हो सकते हैं।

माइग्रेन का कोई कारगर इलाज नहीं है। आमतौर पर 40 की उम्र आते आते यह कम हो जाता है। इस उम्र में तकरीबन 55 फीसदी मरीजों का माइग्रेन ठीक हो जाता है। लेकिन कुछ मरीजों में इस उम्र के बाद भी माइग्रेन पहले की तरह ही बना रहता है। अगर महीने में मरीज को एक या दो बार दर्द होता है और उससे उसके रुटीन पर असर नहीं होता तो माइग्रेन की खास दवा दी जाती है। लेकिन इसके बावजूद 20 फीसदी मरीज ऐसे होते हैं जिन्हें माइग्रेन की शिकायत बनी रहती है। इन मरीजों को प्रोफाइलैक्सिस दवा दी जाती है। मरीज को शुरुआत में कम डोज दी जाती है और एक लेवल पर लाकर उन्हें स्टेबलाइज किया जाता है। जब दर्द महीने में एक बार होता है तो मरीज को 6-7 महीने तक उसी लेवल पर रखा जाता है। उसके बाद दवाओं को धीरे धीरे बंद किया जाता है।

माइग्रेन से बचने के लिए सावधानी
तापमान में तेज बदलाव से बचें। यानि एसी से अचानक तेज धूप में न निकले। या तेज धूप से अचानक एसी में न आएं। तेज गर्मी से आकर काफी ठंडा पानी न पियें। सूरज की सीधी रौशनी से बचें। दिन में 8-10 ग्लास पानी जरुर पियें। कम पानी पीने से डिहाइड्रेशन हो सकता है। डिहाइड्रेशन माइग्रेन का प्रमुख कारण है। उमस वाले मौसम में उन चीजों के सेवन से बचना चाहिए जिसके सेवन के बाद पसीना ज्यादा निकलता हो। इन दिनों चाय कॉफी पीने से बचें। ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखें। गर्भ निरोधक गोलियां लेने से बचें। ऐसा इसलिए क्योंकि इनमें प्रोजेस्ट्रॉन की मात्रा ज्यादा होती है जो हॉर्मोन को असंतुलित कर देती है। सुबह सुर्योदय से पहले नंगे पांव घास पर चलें। इससे तनाव कम होता है। रोजाना कम से कम आधा घंटा योग और प्राणायाम जरुर करें। ये काफी फायदेमंद होता है।

माइग्रेन में क्या-क्या खाएं?
माइग्रेन के मरीजों को तरल पदार्थ ज्यादा मात्रा में लेनी चाहिए। जिसमें सूप, नींबू पानी,नारियल पानी, छांछ, लस्सी पीना चाहिए। फल और हरी सब्जियों का ज्यादा सेवन करें। नमक कम मात्रा में खाएं। चाय, कॉफी और दूसरे कार्बोनेटेड ड्रिंग के सेवन से बचें। शराब और चॉकलेट के सेवन से भी बचें। ज्यादा तेल मासाले वाला खाना और उपवास भी माइग्रेन बढ़ाता है। प्रोसेस्ड, डिब्बाबंद और खमीर वाले फूड आइटम्स से बचें।
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