MCD उपचुनाव में कांग्रेस खुश, AAP को झटका, बीजेपी फिसड्डी

MCD उपचुनाव में कांग्रेस खुश, AAP को झटका, बीजेपी फिसड्डी

दिल्ली MCD के फाइनल मुकाबले से पहले हुए सेमीफाइनल मुकाबले में आम आदमी पार्टी वैसा चमत्कार नहीं कर सकी जिसकी उम्मीद पार्टी ने लगा रखी थी। जिस तरह से विधानसभा चुनाव में AAP ने 70 में से 67 सीट जीत ली थी। उसके बाद ये उम्मीद की जा रही थी कि MCD उपचुनाव में AAP वैसा ही कुछ चमत्कार दिखाएगी लेकिन वैसा कुछ हुआ नहीं। आम आदमी पार्टी ने 13 में से 5 वार्डों में जीत हासिल की। अगर केवल एमसीडी उपचुनाव के नजरिये से इसे देखें तो कहा जा सकता है कि AAP के लिए खुश होने का मौका है। क्योंकि एमसीडी में उसका प्रवेश हो गया। लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी है।

उस दूसरे पहलू को समझने के लिए थोड़ा पीछे चलना होगा। विधानसभा चुनाव में दिल्ली से कांग्रेस का पूरी तरह से सफाया हो गया। एक तरह से कहा जाए तो घुटनों पर रेंगने के काबिल भी नहीं बची थी कांग्रेस। लेकिन  एमसीडी उपचुनाव में उसने 4 वार्डों में जीत हासिल की। अगर इसमें भाटी से निर्दलीय विजेता राजेंद्र सिंह तंवर को मिला दिया जाए तो कांग्रेस का कुल योग 5 हो जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि जीत के तुरंत बाद राजेंद्र तंवर ने कांग्रेस में शामिल होने का एलान कर दिया। कांग्रेस का ये प्रदर्शन तब है जब की इन 13 वार्डों में वो कहीं नहीं थी। विधान सभा चुनाव में हालत पतली हो चुकी थी। अब एमसीडी उपचुनाव में जिस तरह से कांग्रेस ने वापसी की है वो एक शानदार प्रदर्शन और ईमानदार आकलन का हक रखता है।

अब बीजेपी की भी बात कर ली जाए। तो यहां ये कहा जा सकता है कि हम पहले भी तीन थे और अब भी तीन हैं। यानि विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी के तीन ही विधायक जीत सके थे और MCD उपचुनाव में भी बीजेपी उम्मीदवारों की जीत का आंकड़ा तीन पर ही अटक गया। जिस एमसीडी पर बीजेपी पिछले 10 सालों से एकछत्र राज कर रही है उस एमसीडी के उपचुनाव में 13 में से केवल तीन सीट ही जीत सकी बीजेपी। जाहिर तौर पर बीजेपी का ये प्रदर्शन नेतृत्व पर सवाल उठाने के लिए काफी है। क्योंकि निगम स्तर के चुनाव में अगर कोई सत्ताधारी पार्टी तीसरे नंबर पर आए तो ये 2017 के फाइनल मुकाबले में पार्टी के लिए चुनौती जरुर बन सकता है। क्योंकि एक राजनीतिक बयार आज के नतीजों के बाद बहनी शुरु होगी। जिसका असर 2017 के एमसीडी चुनाव पर भी पड़ेगा।

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