अनहोनी हो गई होनी मोदी को रोकने के लिए एक हुए माया और अखिलेश

लखनऊ:  बीजेपी की घेराबंदी से बाहर निकलने के लिए विपक्षी दलों की तरफ से हर तरह की कोशिश की जा रही है। हालात इस कदर हो गए हैं कि जो दल कभी एक दूसरे को देखना नहीं चाहते थे और एक दूसरे को धुर विरोधी हुआ करते थे वो भी एक साथ आने लगे हैं। उनकी कोशिश ये है कि आपसी कटुतो को भुलाकर बीजेपी से मुकाबला किया जाए।

हाल ही में बीएसपी की तरफ से एक पोस्टर जारी किया गय है। जिसमें बीएसपी सुप्रीमो मायावती की फोटो बड़े साइज में है और बाकी दलों के नेताओं को फोटो पासपोर्ट साइज में। इस पोस्टर में सबसे चौंकानेवाला चेहरा यूपी के पूर्व सीएम और समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव का है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि यो दोनों दल एक दूसरे के धुर विरोधी रहे हैं। लेकिन अब चुकी मुकाबला बीजेपी से करना है इसलिए आपसी वैमनस्य को भुला कर साथ आने में ही भलाई समझी जा रही है।

बीएसपी ने जो पोस्टर जारी किया है उसमें समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव, आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव उनके बेटे तेजस्वी यादव, जेडीयू के बागी नेता शरद यादव, टीएमसी अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी शामिल हैं। इस पोस्टर में बड़े अक्षरों में लिखा गया है ‘सामाजिक न्याय के समर्थन में विपक्ष एक हो।‘

विपक्ष की इसी तरह की एकजुटता राष्ट्रपति चुनाव में भी दिखाने की कोशिश की गई थी। लेकिन तब नीतीश कुमार ने बीजेपी उम्मीदवार का समर्थन कर इस तीसरे मोर्चे की एकजुटता को बड़ा झटका दिया था। और बनने से पहले ही महागठबंधन बिखर गया था। अब एक बार फिर विपक्ष की उस एकजुटता को एक करने की कोशिश की जा रही है।

इसी कोशिश का नतीजा है कि पोस्टर में मायावती और अखिलेश एक साथ दिखाई दे रहे हैं। लेकिन पोस्टर का ये साथ सियासी जमीन पर अपने पैर जमा पाती है या नहीं ये आने वाले दिनों में पता चलेगा। क्योंकि सियासत हर दिन खुद को बदल रही है। जिसमें नेताओं के मन से लकर उनके दल तक बदल रहे हैं। हाल ही में बीएसपी और एसपी के कई एमएलसी बीजेपी में शामिल हो गए हैं। आज के दौर में बीजेपी सियासी तौर पर आक्रामक होकर अपनी विस्तारवादी नीति को आगे बढ़ा रही है जबकि उससे मुकाबले करनेवाली विपक्षी पार्टियां रक्षात्मक हो कर अपने वजूद की लड़ाई लड़ रही हैं। बीएसपी का ये नया पोस्टर भी उसी कोशिश का नतीजा है।

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