देश में नोटबंदी पर विरोधियों की जुगलबंदी नतीजा संसद में कामबंदी




नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने कालाधन बाहर निकालने, आकंती गतिविधियों पर लगाम लगाने, नकली नोट को बाजार से खत्म करने और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए 500 और 1000 के नोट बंद कर दिये। लेकिन विरोधियों को केंद्र सरकार का ये फैसला रास नहीं आया। नतीजा ये हुआ को एक तरफ एनडीए है और दूसरी तरफ तमाम विपक्षी दल।

केंद्र सरकार के फैसले के विरोध में तो सभी थे लेकिन सरकार को मिल रही जनता की सहानुभूति की वजह से कोई राजनीतिक दल खुलकर विरोध करने का साहस नहीं जुटा रहा था। फिर पश्चिम बंगाल से ममता बनर्जी ने केद्र सरकार के खिलाफ एकजुट होने के लिए विपक्षी दलों के बीच जुगलबंदी की शुरुआत की। अपने धुर विरोधी वाम दल के नेता सीताराम येचुरी से भी मुलाकात कर विरोध में साथ देने कि अपील की। इसके बाद एक एक कर उन सभी दलों को एक साथ लाने की मुहिम में जुट गईं ममता बनर्जी।

केंद्र सरकार के नोटबंदी की शिकायत लेकर राष्ट्रपति भवन तक मार्च कर चुकी हैं ममता बनर्जी। उनके साथ पूरा विपक्ष था। कांग्रेस भी नोटबंदी के खिलाफ विपक्षी दलों की इस जुगलबंदी में शामिल हो गया। क्योंकि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पहले ही नोट बदलवाने के लिए लाइन में खड़े हो चुके थे। और सरकार के फैसले पर सवाल भी उठा चुके थे।

राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के साथ विरोध का मंच साझा किया ममता बनर्जी ने। जिसमें मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले को सिरे से खारिज करते हुए इसे वापस लेने की मांग की। हलांकि दिल्ली में केजरीवाल की इस सभा की शुरुआत विरोध से हुई। बाद में हालात सामान्य हुआ तो केजरीवाल और ममता बनर्जी जनता को ये समझाने कि कोशिश करते रहे कि केंद्र सरकार का फैसला गलत है।

बुधवार को सदन में कोई काम नहीं हुई। ना ही नोटबंदी पर बहस हुई और ना ही कोई और चर्चा। क्योंकि विपक्ष वोटिंग के प्रावधान के तहत चर्चा चाहता है। सरकार चर्चा के लिए तैयार है लेकिन विपक्ष का वोटिंग का प्रावधान सरकार को मंजूर नहीं। संसद के दोनों सदन में दिनभर विपक्ष का हंगामा जारी रहा। तो दिल्ली में सार्वजनिक सभा के बाद दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी दिल्ली में RBI के बाहर जाकर जम गए। संदेश ये देने की कोशिश की जा रही है कि सरकार का फैसला गैरवाजिब है। यानि कहा जा सकता है कि नोटबंदी पर विरोधियों की इस जुगलबंदी से संसद में कामबंदी के हालात बन गए हैं।

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