वृद्धा आश्रम में रह रहे हैं माहत्मा गांधी के पोते कनु गांधी

बापू यानि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बताए रास्तों पर चलने की कसमें कांग्रेस से लेकर बीजेपी तक और राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार तक सभी ने खाई हैं। कांग्रेस मुख्यालय में चले जाइये तो वहां गांधी जी की तस्वीर दीवार पर टंगी मिल जाएगी। केंद्र सरकार के दफ्तर चले जाइये तो वहां भी वो तस्वीर दिख जाएगी। किसी राज्य  सरकार के दफ्तर या मंत्रालय में चले जाइये तो वहां भी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीर दिख जाएगी।

लेकिन उसी महात्मा गांधी के पोते अपनी पत्नी के साथ दिल्ली में एक ओल्ड एज होम में दिन बिता रहे हैं। कनु रामदास गांधी और उनकी पत्नी दिल्ली फरीदाबाद बॉर्डर पर बने गुरु विश्राम गृह आश्रम में रह रहे हैं। लेकिन गांधी परिवार की तरफ से उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।

एमआईटी से पढ़ाई करने के बाद नासा में काम कर चुके कनु अपनी इस हालत के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं मानते हैं। सरल स्वभाव के कनु का कहना है कि मदद के लिए वो किसी के सामने हाथ नहीं फैला सकते।

जब उनसे पूछा जाता है कि उनकी मदद के लिए क्यों कोई सामने नहीं आया तो इसपर कनु का कहना है कि मेरी गलती है कि मैं भीख मांगने में शर्माता हूं। प्रधानमंत्री वर्धा के सेवाग्राम आए थे। मैने घूम घूमकर वहां के हालात दिखाए थे। उन्होंने मुझसे कहा था कि आप जब चाहें मेरे पास आ सकते हैं। आपके लिए कुछ करूंगा। लेकिन मैं नहीं गया।  क्योंकि मुझे हाथ फैलाना पसंद नहीं है।

कनु रामदास गांधी के वृद्धाश्रम में रहने की खबर के बाद आम लोग तो उनसे मुलाकात करने आ रहे हैं। लेकिन गांधी के नाम पर अपनी सियासी जमीन तैयार करनेवाली राजनीतिक पार्टियां उनकी सुध लेने नहीं आई। हां इस वृद्धाश्रम के संचालक ने इतनी आत्मीयता जरुर दिखाई है कि उनके लिए वहां एक एसी कमरा तैयार करवा दिया है।

कनु की इस हालत पर गांधी परिवार का कहना है कि इसके लिए वो खुद जिम्मेदार हैं। परिवार का मानना है कि गांधी परिवार की मदद करना सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। महात्मा गांधी को पड़पोते तुषार गांधी का कहना है कि गांधी परिवार की मदद करना सरकार या किसी पार्टी की जिम्मेदारी नहीं है। जहां तक बात कनु गांधी की है तो इस हालत के लिए वो खुद जिम्मेदार हैं। किसी और को इसके लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

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