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पांच दिनों से महाराष्ट्र में किसानों का चक्का जाम, सब्जी-दूध की महाकिल्लत

पांच दिनों से महाराष्ट्र में किसानों का चक्का जाम, सब्जी-दूध की महाकिल्लत

नई दिल्ली:  महाराष्ट्र के किसानों की हड़ताल का पांचवा दिन है। इन पांच दिनों की हड़ताल के बाद सबसे बुरा असर सब्जी और दूध की आपूर्ति पर पड़ा है। थोक बजार में सन्नाटा पसरा है और खुदरा बाजार में जो थोड़ बहुत सब्जी चोरी छिपे बेची जा रही है तो उसके लिए दोगुने से भी ज्यादा कीमत चुकाना पड़ रहा है। हालात ये हो गए हैं कि लोगो एक थैली सब्जी के लिए अपनी पूरी जेब खाली करने पर मजबूर हैं। लेकिन इतने के बाद भी इस बात की गारंटी नहीं है कि सब्जी मिल ही जाएगी।

दूध का भी यही हाल है। किसानों के इस हड़ताल में दूध कारोबारी भा शामिल हैं। इसलिए वो दूध की सप्लाई भी नहीं होने दे रहे हैं। अगर कहीं से दूध की सप्लाई की जाती है तो टैंकर को जबरन रोककर सड़कों पर दूध बहा दिया जा रहा है। हलांकि पिछले दिनों पुलिस की तरफ इस तरह की घटना पर रोक लगाने के लिए दूध सप्लाई करनेवाले टैंकरों के साथ पेट्रोलिंग की व्यवस्था की गई थी। लेकिन इतने भर से जरुरत पूरी नहीं हो सकती।

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किसानों के इस हड़ताल का सबसे बुरा असर नासिक, अहमदनगर पर पड़ा है। लेकिन अब मुंबई तक इसका असर पहुंचने लगा है। इस आंदोलन की अगुवाई कर रहे किसान क्रांति मोर्चा और राज्य के अलग अलग हिस्सों के किसान संगठन शामिल हैं। किसानों ने 5 जून को मुंबई को छोड़कर पूरे महाराष्ट्र में बंद का ऐलान किया था। किसानों के इस बंद को महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार में शामिल शिवसेना ने भी अपना समर्थन दिया है।

किसानों की मांग क्या है?

किसानों की मांग है कि उनका पूर्ण कर्ज माफ किया जाए। स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिश लागू की जाए। कमीशन की सिफारिशों में किसानों को उनकी उपज की लागत से डेढ़ गुना ज्यादा देने और फसल लागत मूल्य से 50 फीसदी अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य देने जैसी सिफारिश शामिल है। किसान बिना ब्याज खेती के लिए कर्ज चाहते हैं। 60 साल के किसानों के लिए पेंशन स्कीम लागू की जाए और दूध की कीमत 50 रुपये प्रति लीटर मिले।

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