विपक्ष का दावा खारिज, EC का जवाब ‘सुरक्षित है EVM’ जानिये EVM की कैसी सुरक्षा होती है

वोटिंग के बाद मशीन को कैरिंग बैग में डाल दिया जाता है। प्रेक्षक अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी, एसपी, सहायक रिटर्निंग अफसर, अनुविभागीय अधिकारी, पार्टियों के प्रतिनिधियों के सामने ईवीएम को सील किया जाता है। तीनों मशीनों पर पोलिंग बूथ का पता और पीठासीन अधिकारी के दस्तखत होते हैं। इस दौरान हर पार्टी के दो-दो एजेंट मौजूद रहते हैं। इसमें से एक मुख्य एजेंट और दूसरा रिलीवर होता है। किसी भी बूथ पर एक पीठासीन अधिकारी और तीन मतदान अधिकारी होते हैं।

टीवी टुडे के मुताबिक कटनी के जिला कलेक्टर और जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. पंकज जैन ने बताया कि वोटिंग के बाद चुनाव आयोग के दिशानिर्देश का पालन कर ईवीएम को कड़ी सुरक्षा में स्ट्रॉन्ग रूम में ले जाया जाता है।

बूथ से लेकर स्ट्रॉन्ग रुम तक पहुंचने में ईवीएम की सुरक्षा में पैरामिलिट्री फोर्स, पीएसी के जवान और लोकल पुलिस शामिल होती है। इनके साथ कार्यपालक मजिस्ट्रेट और चुनाव अधिकारी भी होते हैं। स्ट्रॉन्ग रुम तक पहुंचने से पहले ईवीएम एकत्रित करने के लिए विधान सभा के मुताबिक सेंटर बनाए जाते हैं। जहां पर चुनाव अधिकारी अपने-अपने बूथ की ईवीएम जमा करते हैं।

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