चारा घोटाले में लालू यादव जेल भेजे गए, पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्रा बरी

नई दिल्ली:  रांची की सीबीआई अदालत ने चारा घोटाले में आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव को दोषी करार दिया है। इस मामले में अब 3 जनवरी को सजा का एलान होगा। कोर्ट का फैसला आने के बाद पुलिस ने लालू यादव को हिरासत में ले लिया। अब लालू 3 जनवरी तक जेल में रहेंगे। लालू को रांची की बिरसा मुंडा जेल में रखा जाएगा। इस मामले में 22 आरोपी थे। जिनमें से 15 को दोषी करार दिया गया है जबकि 7 लोगों को बरी किया गया है। अदालत ने जगन्नाथ मिश्रा, ध्रुव भगत, विद्या सागर निषाद, सरस्वती चंद्र, अजीत चंद्र चौधरी को बरी कर दिया गया है। जिस वक्त ये घोटाला हुआ था तब लालू बिहार के सीएम थे।

कोर्ट का फैसला आने के बाद लालू के ट्वीटर अकाउंट से बीजेपी पर हमला किया गया है। जिसमें लिखा गया धूर्त भाजपा अपनी जुमलेबाजी व कारगुजारियों को छुपाने और वोट प्राप्त करने के लिए विपक्षियों का पब्लिक पर्सेप्शन बिगाड़ने के लिए राजनीति में अनैतिक और द्वेष की भावना से ग्रस्त गंदा खेल खेलती है।

सीबीआई अदालत जिस मामले में फैसला सुनाया है वो झारखंड के देवघर ट्रेजरी से जुड़ा है। जहां से 1994 से 1996 के बीच 84.5 लाख रुपये की निकासी की गई थी। लालू उन 22 आरोपियों में से एक हैं जिनके खिलाफ पशुपालन घोटाले में केस चल रहा है। बिहार के पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्रा भी इसी मामले में आरोपी थे।

कोर्ट के फैसले पर आरजेडी प्रवक्ता मनोज झा ने कहा लालू के साथ नाइंसाफी हो रही है। उन्होंने कहा कि गड़बड़ी पहल से चल रही थी। लेकिन लालू जी ने उस गड़बड़ी को उजागर किया। उन्होंने कहा अदालत के फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दी जाएगी।

सौजन्य- एएनआई

वहीं इसपर जेडीयू की तरफ से कहा गया है कि लालू जी ने बाबा बैद्यनाथ की नगरी से पैसों की चोरी की थी। उनपर शनि का प्रकोप गिरा है। जेडीयू ने कहा कि लालू भ्रष्टाचार के मसीहा बन चुके थे। उन्होंने कहा कि ये न्यायालय का फैसला है। क्या अब आरजेडी न्यायपालिका पर भी सवाल उठाएगी।

2014 में पटना हाईकोर्ट ने लालू के खिलाफ चल रहे दूसरे मामलों पर रोक लगा दी थी। कोर्ट के फैसले में कहा गया था कि चुकी लालू को पशुपालन से जुड़े एक मामले में सजा हो चुकी है इसलिए समान व्यक्ति के खिलाफ समान केस में समान सबूत और समान गवाह के बल पर अलग से मुकदमा नहीं चल सकता। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया। और पशुपालन से जुड़े हर मामले की अलग अलग सुनवाई के आदेश दिये थे।

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