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हर तरफ जन्माष्टमी की धूम 58 साल बाद बना द्वापर जैसा योग

हर तरफ जन्माष्टमी की धूम 58 साल बाद बना द्वापर जैसा योग

दिल्ली: देश ही नहीं विदेशों में भी जन्माष्टमी की धूम है। इस बार श्रीकृष्ण का 5243वां जन्मदिन है। मंदिरों में भक्तों की लंबी कतार सुबह से ही दिखाई देने लगी थी। इस बार के जन्माष्टमी में खास बात भी है। खास बात ये है कि इसबार कृष्ण के जन्म का वही योग बना है जो द्वापर युग में बना था। यानि तब जब बाल गोपाल का जन्म हुआ था। ये योग 58 सालों के बाद बना है। गुरुवार दोपहर 3 बजकर 21 मिनट से रोहिणी नक्षत्र, अष्टमी, हर्षण का जयंती योग बना रहा है। कृष्ण का जन्म रात में हुआ था इसलिए इसे 25 और 26 अगस्त के बीच की रात ही माना जाएगा। पंडितों के मुताबिक रोहिणी नक्षत्र का मान 26 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 50 मिनट तक रहेगा।

क्या है पूजा का शुभ समय ?
श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद में कृष्ण पक्ष के अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में रात के 12 बजे हुआ था। यही वजह है कि हर साल भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव रात के 12 बजे ही मानाया जाता है। पूजन का शुभ मुहूर्त रात के 12 बजे से लेकर 12.45 मिनट तक है। व्रत के पारण का समय 26 अगस्त को सुबह 10 बजकर 52 मिनट तक है।

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