गढ़वाल से लखनऊ तक पहुंचे 45 साल के योगी की पूरी कहानी जानिये 2 मिनट में

नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश के 21वें सीएम योगी आदित्यनाथ आज उस लखनऊ में पहुंच चुके हैं जहां से देश की सत्ता का केंद्र दिल्ली के लिए रास्ता गुजरता है। बीजेपी ने जिस योगी के हाथ में इस अति महत्वपूर्ण प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी है उस योगी का अतीत उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल से प्रारंभ होता है।

5 जून 1972 को उत्तराखंड (पहले का उत्तरप्रदेश) के पौड़ी गढ़वाल में योगी आदित्यनाथ का जन्म हुआ। उनका शुरुआती नाम अजय सिंह था। अजय सिंह ने गढ़वाल विश्वविद्यालय से बीएससी की डिग्री हासिल की। अस्सी के दशक में देश में एक आंदोलन की शुरुआत हो रही थी। ये आंदोलन अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए था। राम मंदिर के लिए हो रहे उस आंदोलन से उठने वाले जय श्री राम का नारा गढ़वाल के अजय सिंह के कानों को भी सुनाई दिया।


राम जन्मभूमि के लिए हो रहे उस आंदोलन में लाखों की भीड़ से उठनेवाले जयघोष ने अजय सिंह के कदमों को गढ़वाल से गोरखपुर की तरफ खींच लिया। और गोरखपुर का गोरखनाथ मठ अजय सिंह का नया ठिकाना बन गया। गोरखनाथ मठ के साथ ही जुड़ी है योगी आदित्यनाथ की राजनीतिक शुरुआत।

Read Also :

– योगी आदित्यनाथ बनेंगे यूपी के सीएम, 2 डिप्टी सीएम के साथ रविवार को लेंगे शपथ
आठवीं सदी में मत्सयेंद्र नाथ नाम के संत ने नाथ पंथ की शुरुआत की थी। मत्सयेंद्र नाथ के बाद उनके शिष्य गोरखनाथ ने नाथ संप्रदाय को पूरे देश में फैलाया। सैंकड़ो एकड़ में फैला गोरखपुर के गोरखनाथ मठ की शुरुआत गोरखनाथ ने ही की थी। आदित्यनाथ ने भी यहां एक साल तक नाथ पंथ के मुताबिक शिक्षा हासिल की।

15 जनवरी 1994 को महंत अवैद्धनाथ ने आदित्यनाथ को दीक्षित कर अपना शिष्य बना लिया। इसके बाद 22 साल का अजय सिंह आदित्यनाथ बन गया। इसी के बाद से उनके संन्यास और राजनीति की शुरुआत हुई। 1994 में आदित्यनाथ योगी बने लेकिन राजनीति में उन्होंने 1998 में अपना कदम रखा। तब योगी की उम्र महज 26 साल की थी।

Read Also :

– सीएम बनने पर योगी आदित्यनाथ को शिवसेना की सलाह…

1998 में योगी आदित्यनाथ ने राजनीति में कदम रखा था लेकिन राजनीति में गोरखनाथ मठ की सक्रियता पुराने वक्त से थी। महंत अवैद्धनाथ ने योगी आदित्यनाथ को अपना राजनीतिक वारिश बनाकर 1998 के लोकसभा चुनाव में उतार दिया। 1998 में शुरु हुआ योगी आदित्यनाथ का सफर हर दिन एक नई बुलंदी पर पहुंचता गया। अबतक योगी गोरखपुर से 5 बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं।

कट्टर हिंदुत्व के एजेंडे के साथ योगी आदित्यनाथ शुरुआत से लेकर आज तक खड़े हैं। हिंदुत्व का यही एजेंडा आदित्यनाथ के राजनीति का हथियार भी है। जो वक्त की कसौटी पर घिसकर लगातार पैना होता जा रहा है। योगी हिंदू युवा वाहिनी नाम का अपना संगठन भी चलाते हैं। उनका ये संगठन यूपी के तकरीबन 27 जिलों में फैला है। योगी की इस हिंदू युवा वाहिनी ने धर्म परिवर्तन के खिलाफ भी जंग छेड़ रखी है। अपनी कट्टरवादी छवि और भाषण की वजह से योगी के साथ कई विवाद भी जुड़े। लेकिन हर विवाद के बाद उनका कद बढ़ता चला गया।

Read Also :

– यूपी में बनेंगे 2 डिप्टी सीएम, सीएम बनेंगे आदित्यनाथ

योगी आदित्यनाथ के जनाधार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकत है कि हर चुनाव में उनके जीत का वोट प्रतिशत बढ़ता गया। अपनी कट्टरवादी सोच की वजह से कई बार उनका अपनी ही पार्टी के साथ टकराव भी हुआ। लेकिन योगी अपनी विचारधारा पर कायम रहे। उनके तीखे तेवर यूपी की जनसभा से लेकर लोकसभा तक में दिखाई देती है।

Loading...