क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर की इस बीमारी के बारे में काफी कम लोग जानते हैं

नई दिल्ली:  क्रिकेट के मैदान पर तमाम बड़े रिकॉर्ड अपने नाम रखने तथा क्रिकेट की दुनिया में भगवान कहे जाने वाले सचिन रमेश तेंदुलकर मंगलवार को अपना 45वां जन्मदिन मना रहे हैं। विश्वास नहीं हो रहा है कि भगवान का नाम पाने वाला शख्स अपनी उम्र के अर्धशतक के करीब पहुंच गया है। क्रिकेट के इस भगवान का जन्‍म 24 अप्रैल 1973 को मुंबई में हुआ था। वैसे तो सचिन की पूरी लाइफ ही रिकॉर्ड्स की एक चलती-फिरती किताब है, लेकिन उनके कुछ अनछुए पहलू ऐसे भी हैं। जिनके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है।
आज से पांच साल पहले सचिन तेंदुलकर ने इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह दिया था, लेकिन आज भी सचिन के जन्मदिन का क्रेज पूरे भारत में किसी त्योहार की तरह ही मनाया जाता है। सचिन को जहां फैंस, उनके मित्र व परिवारजन जन्मदिन पर सोशल मीडिया पर बधाइयां देने में लगे हैं, वहीं हम आपको उनकी जिंदगी व क्रिकेट से जुड़े कुछ विशेष तथ्य बताने जा रहे हैं।
 बहुत कम लोगों को पता है कि सचिन तेंदुलकर अपने पिता रमेश तेंदुलकर की दूसरी पत्नी के पुत्र है। रमेश तेंदुलकर की पहली पत्नी से तीन संताने अजीत, नितिन और सविता हुई थी। ये तीनों सचिन से बड़े है।
 सचिन तेंदुलकर को नींद में चलने की बीमारी है, साथ ही नींद में बोलने की आदत भी है।
क्रिकेट का बादशाह बनने से पहले और इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखने से पहले सचिन के पास 13 सिक्के थे, जो आज भी उनके पास हैं। उन्हें ये सिक्के इनाम के तौर पर मिलते थे। अभ्यास के दौरान सचिन के कोच रमाकांत आचरेकर स्टंप पर एक सिक्का रखते थे तथा सचिन के बल्लेबाज़ी करने आने पर दूसरे खिलाड़ियों को उन्हें आउट कर सिक्का हासिल करनी कहते थे। उनके आउट नहीं होने पर सिक्का सचिन का हो जाता था।सचिन ने उस समय ऐसे 13 सिक्के जमा किए थे।
हम सभी को पता है कि सचिन ने अपना डेब्यू 1989 में पाकिस्तान के विरूद्ध किया था, लेकिन वह अपने डेब्यू से दो साल पहले 1987 में पाकिस्तान के भारत दौरे पर वह पाकिस्तान टीम की ओर से खेल चुके थे। उन्होंने पाकिस्तान टीम के लिए बतौर स्थानापन्न क्षेत्ररक्षक फिल्डिंग किया था।
1990 में सचिन को पहली बार मैन ऑफ द मैच के रूप में शैम्पेन की बोतल गिफ्ट की गई थी, जिसे सचिन ने खोलने से इंकार कर दिया था, क्योंकि उस समय उनकी उम्र 18 वर्ष से कम थी।
 सचिन ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ अपने पहले टेस्ट मैच में सुनील गावस्कर से उपहार में मिले पैड्स को पहन कर खेला था।
थर्ड अंपायर द्वारा आउट दिए जाने वाले पहले बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर हैं। 1992 में, डरबन में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ़ खेले जा रहे टेस्ट मैच के दूसरे दिन जोंटी रोड्स के थ्रो के बाद यह मामला तीसरे अंपायर को रेफ़र किया गया। अंपायर कार्ल लाएबनबर्ग ने सचिन को आउट करार दिया था।
सचिन भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित होने वाले सर्वप्रथम खिलाड़ी और सबसे कम उम्र के व्यक्ति हैं।
5 फुट 5 इंच के इस क्रिकेटर के नाम क्रिकेट की दुनिया में 10, 20, 50 नहीं बल्कि पूरे 69 रिकॉर्ड हैं।
सबसे रोचक तथ्य यह है कि सचिन तेंदुलकर क्रिकेट के मैदान पर बल्लेबाज़ी और गेंदबाजी तो दायें हाथ से करते हैं, लेकिन वह लिखते बाये हाथ से हैं।
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