चीन के स्कूलों में बच्चे इस तरह से करते हैं पढ़ाई, बीच में नींद भी लेते हैं

नई दिल्ली:  किसी भी देश में स्कूल सिस्टम वो आधार होता है जहां से देश का भविष्य तैयार होता है। यही वजह है कि हर देश में अलग अलग एजुकेशन सिस्टम होता है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी चीन की यात्रा पर हैं। इसलिए यहां हम चीन के एजुकेशन सिस्टम के बारे में ही बात करते हैं।  एक बात तो तय है कि भारत और चीन के एजुकेशन सिस्टम में काफी अंतर है।

चीन में बच्चोँ के स्कूल जाने की शुरुआत 6 साल में होती है। उस उम्र में बच्चों को ग्रेड 1 में एडमिशन लेना होता है। यह प्राइमरी एजुकेशन का हिस्सा होता है। प्राइमरी एजुकेशन ग्रेड 1 से ग्रेड 6 तक होती है।

प्राइमरी एजुकेशन के बाद बच्चों को जूनियर सेकेंडरी में भाग लेना होता है। जिसमें ग्रेड 7 से ग्रेड 9 तक की पढ़ाई होती है। इस ग्रेड को 15 साल तक में बच्चे पूरा करते हैं।

इसके बाद सेकेंडरी एजुकेशन होती है। जिसमें ग्रेड 10 तक की पढ़ाई होती है। इसके बाद पोस्ट सेकेंडरी की पढ़ाई करवाई जाती है। चीन में स्कूल की पढ़ाई ग्रेड 14 तक हीती है। उसके बाद बैचलर या मास्टर्स डिग्री करवाई जाती है।

चीन के स्कूलों में बच्चों के फिजिकल वर्कआउट पर भी काफी ध्यान दिया जाता है। इसी वजह से वहां दिन में दो बार बच्चों से वार्म अप करवाया जाता है। सुबह के बाद बच्चे दोपहर में भी वार्म अप करते हैं। जबकि भारत के स्कूलों में एक बार (केवल सुबह) वार्म अप करवाया जाता है।

स्कूल में बच्चों को खाने के लिए एक घंटे का वक्त दिया जाता है। स्कूल के बीच में बच्चों को सोने की भी इजाजत दी जाती है। यानि स्कूल के वक्त बच्चे कुछ देर के लिए सो भी सकते हैं। चीन के स्कूलों में सुबह 8 बजे से पढ़ाई शुरु होती है और वो शाम के 4 बजे तक चलती है। कई स्कूलों में इसके बाद एक्सट्रा एक्टिविटी भी करवाई जाती है।

चीन में प्राइवेट और पब्लिक स्कूल दोनों हैं। वहां प्राइवेट स्कूल में पढ़ाई करवाना काफी महंगा होता है। चीन के एक प्राइवेट स्कूल में 60 हजार रुपया प्रति महीने का खर्च आता है। लेकिन उन स्कूलों में पढ़ाई का स्तर भी काफी अलग होता है।

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