Arvind kejriwal

Kejriwal एक बार फिर एक बड़ी गलती करने जा रहे हैं ?

Kejriwal एक बार फिर एक बड़ी गलती करने जा रहे हैं ?

क्या Arvind Kejriwal एक बार फिर उसी दिशा में बढ़ रहे हैं जहां से वो एक बार वापस आ चुके हैं और दोबारा उस दिशा में न बढ़ने की कसम खाई थी। उस वापसी के वक्त उन्होंने ये भी कहा था कि अब ये गलती दोबारा नहीं होगी। इसके लिए उन्होंने पूरी दिल्ली से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगी थी।

बात ज्यादा पुरानी नहीं है। 2014 की ही है। जब लोकसभा चुनाव की तैयारी हर तरफ हो रही थी। उस तैयारी में आम आदमी पार्टी ने भी अपनी भागीदारी दर्ज करने की कसम खा रही थी। ये वो दौर था जब दिल्ली को आम आदमी पार्टी या यूं कहें Arvind Kejriwal छोड़ चुके थे। कहने का मतलब ये है कि पार्टी बनाने के महज 15 महीनों में दिल्ली वालों ने उनपर जो भरोसा जताया था उसे उन्होंने 49 दिनों में ही तोड़ दिया। उस वक्त दिल्ली सरकार और राजनिवास के बीच घटनाक्रम कुछ इस कदर आगे बढ़ती थी, सुबह से दोपहर और शाम से रात कुछ इस कदर हुआ करती थी दिल्ली में कि पुराने पंडितों के लिए भी इस बात का आकलन करना मुश्किल हो गया था कि अब आगे क्या होगा और अगली सुबह की शुरुआत किस सियासी झमेले से होगी। ये सबकुछ हो रहा था दिल्ली में कांग्रेस के समर्थन से बनी आम आदमी पार्टी की 49 दिनों की सरकार में। खैर जैसे तैसे 49 दिन तक सत्ता सुख भोगने के बाद सीएम Arvind Kejriwal ने इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा ये कहकर दिया था कि जनलोकपाल बिल के लिए सीएम की कुर्सी हजारों दफा कुर्बान कर दूंगा। खैर ये बात हुई तब की।

अब 2014 के लोकसभा की बात कर लें। लोकसभा में सभी पार्टियों की तरह आम आदमी पार्टी ने भी अपने उम्मीदवार खड़े किये। कुमार विश्वास से लेकर खुद Arvind Kejriwal तक चुनाव के मैदान में कूद गए। इसबार  Kejriwal ने अपनी कर्मभूमि वाराणसी बनाई। इसकी एक खास वजह थी क्योंकि वाराणसी से BJP के पीएम उम्मीदवार Narender Modi चुनाव लड़ रहे थे। अबतक  Kejriwal सीएम तो बन चुके थे लेकिन राष्ट्रीय पृष्ठभूमि में उनका कद काफी छोटा था। अपने उसी कद को वो बड़ा करना चाहते थे तब भी और आज भी उसी कोशिश में हैं। इसी के तहत वाराणसी का चुनाव किया गया लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए। खैर वाराणसी में  Kejriwal की कहानी खत्म हो गई। अबतक वो दिल्ली का भरोसा भी काफी हद तक खो चुके थे। दिल्ली से निकलकर  Kejriwal ने एक बड़ी गलती कर दी थी। इसका एहसास उन्हें वाराणसी से खाली हाथ लौटने के बाद हुआ। अब आज के वक्त में आ जाइये….

अब एकबार फिर आम आदमी पार्टी दिल्ली की सरहद से निकलकर देश के पटल पर अपना नाम लिखना चाहती है। पहले तो पार्टी ने कहा वो पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ेगी, फिर पार्टी की तरफ से एलान हुआ कि वो गोवा का भी चुनाव लड़ेगी, इसके बाद अब ये कहा जा रहा है कि पार्टी गुजरात का भी चुनाव लड़ेगी। जहां एक तरफ पार्टी तीन राज्यों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है वहीं दिल्ली में उनके 21 विधायकों पर लाभ के पद को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जिसमें संभावना ये भी जताई जा रही है कि उन्हें अयोग्य करार दिया जा सकता है।

यानि दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार एक अनिश्चितता की तरफ बढ़ रही है।  Kejriwal की तरफ से अक्सर मोदी सरकार पर काम न करने देने के आरोप लगाए जा रहे हैं। लाभ के पद वाला बिल राष्ट्रपति ने नामंजूर कर दिया। जिसके बाद  Kejriwal की तरफ से कहा गया की मोदी सरकार ने बिल को नामंजूर करवाया। क्योंकि वो हमें काम नहीं करने देना चाहते। ये हाल तब है जब कि खुद  Kejriwal के लॉ ऑफिसर ने उन्हें सलाह दी थी कि वो ऑफिस ऑफ प्रॉफिट बिल को भूल जाएं। क्योंकि ये संवैधानिक नहीं है। लेकिन उनकी बात दरकिनार हो गई, क्योंकि घटनाक्रम और उनके पुराने सहयोगियों की तरफ से ये बात कई बार कही जा चुकी है कि  Kejriwal एक तानाशाह हैं। तो क्या उसी तानाशाही सोच का इजहार वो दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच तनाव पैदा करने के लिए करते हैं? अगर ऐसा है तो ये भी कहा जा सकता है कि जो भी विवाद सामने आए हैं वो अनजाने में नहीं हुए हैं उसके पीछे एक दूरगामी रणनीति है। बीजेपी भी इसी बात पर जोर देती रही है। उस रणनीति की एक धुंधली सी झलक अब दिखाई देने लगी है और उम्मीद की जा सकती है कि जैसे-जैसे 2017 करीब आएगा वैसे-वैसे वो रणनीति और साफ होगी।

2017 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गुजरात, गोवा में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन पांच राज्यों की तरफ आम आदमी पार्टी भी टकटकी लगाए देख रही है। अगर यूपी को छोड़ दें तो बाकी के चार राज्यों में BJP काफी मजबूत स्थिति में हैं। पंजाब, गोवा और गुजरात में कांग्रेस इस हालत में है नहीं की वो बीजेपी के सामने चुनौती पेश कर सके। इसी विरोध शून्यता का लाभ  Kejriwal उठाना चाहते हैं। लेकिन क्या इस लाभ के चक्कर में वो दिल्ली से दूर हो रहे हैं? और एक बार फिर वही आरोप और माफी की सियासत दिल्ली में दिखाई देगी जैसा कि 2014 में दिखाई दी थी। जिसमें बीजेपी पर आरोप लगाकर  Kejriwal लोकसभा चुनाव लड़ने निकल पड़े और जब हाथ कुछ नहीं आया तो वापस दिल्ली आ गए और दिल्लीवालों से माफी मांग ली।

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