कासगंज के चंदन की मौत पर काजल हिंदुस्तानी पूछ रही है सवाल, देखें Video

कासगंज के चंदन की मौत पर काजल हिंदुस्तानी पूछ रही है सवाल, देखें Video

नई दिल्ली:  देश जब 69वां गणतंत्र दिवस मना रहा था तभी यूपी के कासगंज में चंदन नाम के एक किशोर हाथ में तिरंगा लेकर सड़कों पर निकला था। उसके साथ उसके कुछ साथी भी थे। कासगंज की जिन सड़कों पर चंदन कभी बेखौफ होकर चहलकदमी किया करता था उन्हीं सड़कों पर चंदन अपने आखिरी सफर पर निकला है इसका किसी को अंदाजा नहीं था।

हाथों में तिरंगा लिये बंदे मातरम का नारा लगाते हुए चंदन कासगंज के चौराहे पर पहुंचा। लेकिन उसकी ये दिलेरी कुछ बुझदिलों को मंजूर नहीं थी। तिरंगा यात्रा में शामिल चंदन और उसके साथियों के साथ कहासुनी शुरु हो गई। इसी बीच बारुद से भरी पीतल के कारतूस पर चंदन के नाम मौत का पैगाम भेजा गया। जो चंदन चंद मिनट पहले तक वंदे मातरम का नारा लगा रहा था, गणतंत्र के 69 साल पूरे होने पर झूम रहा था उसका शरीर शिथिल हो गया था।

जिस तिरंगे को चंदन ने हाथ में थाम रखा था अब उसने उसके शरीर को अपने आगोश में ले लिया था। कासगंज का चौराहा चंदन के खून से लाल हो चुका था। हर तरफ अफरा तफरी का माहौल था। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि एक आजाद देश में एक मतवाले हिंदुस्तानी को क्या केवल इसलिए गोली मार दी गई क्योंकि वो देश का राष्ट्रीय ध्वज लहरा कर आगे बढ़ रहा था।

जिस हालत में चंदन की हत्या की गई उसने कई सवाल खड़े कर दिये। इस देश ने अखलाक, जुनैद रोहित बेमुला की मौत को देखा है। और उन मौतों पर दिल्ली प्रेस क्लब से लेकर जेएनयू और संसद परिसर तक में खुद को खतरे में बतानेवालों की तीखी बोली को इस देश ने सुना और झेला है।

लेकिन जब चंदन का शरीर तिरंगे में लिपटकर कासगंज की गलियों से गुजरते हुए उसके घर तक पहुंचा तो पहले वाली वो आवाज खामोश थीं। आज भी खामोश हैं। उनकी इस खामोशी ने इतना तो बता दिया है कि शायद इस मौत से उनका कोई सरोकार नहीं है। इसी सवाल को ट्वीटर के जरिये काजल हिंदुस्तानी ने उठाया है।

काजल ने ट्वीटर पर शेयर किये हुए अपने वीडियो में हाथ में अलग अलग कार्ड ले रखे हैं जिसमें उन्होंने अलग अलग बातें लिखी हुई हैं। इन्हें देखने, समझने और पढ़ने के बाद इतना तो समझ में आ गया है कि खुद को डर के माहौल में दिखानेवाले उन तथाकथित साहित्यिक सूरमाओं के मुंह पर भी तमाचा मारा है।

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