तीसरी बार कर्नाटक के सीएम बने येदियुरप्पा, कांग्रेस बोली ‘ये लोकतंत्र की हत्या है’

नई दिल्ली:  सियासी अनिश्चितताओं के बीच कर्नाटक की सत्ता का नया सिपाही नियुक्त हो चुका है। बीजेपी के बीएस येदियुरप्पा ने कर्नाटक के सीएम पद की शपथ ले ली है। उन्हें राज्यपाल वजूभाई वाला ने उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। येदियुरप्पा ने तीसरी बार कर्नाटक के सीएम की कमान संभाली है।

शपथग्रहण से पहले येदियुरप्पा ने मंदिर में पूजा की। उसके बाद राजभवन पहुंचकर उन्होंने सीएम पद की शपथ ली। शपथ लेने के बाद सबसे पहले येदियुरप्पा की तरफ से बयान आया कि अब कर्नाटक का विकास शुरु हो गया है। येदियुरप्पा को 15 दिनों में बहुमत साबित करना है।

एक तरफ कर्नाटक के तख्त को उसका नया उत्तराधिकारी मिला था तो दूसरी तरफ विरोध के सुर तेज हो रहे थे। येदियुरप्पा के शपथ लेने खिलाफ कांग्रेसी विधायक गांधी मूर्ति के सामने धरने पर बैठ गए। कांग्रेसी विधायकों का कहना है कि ये लोकतंत्र की हत्या की गई है। राज्यपाल के फैसले पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी भले ही सबसे बड़ी पार्टी है लेकिन उसके पास बहुमत साबित करने के लिए जरुरी 112 विधायक वहीं है। बीजेपी के पास केवल 104 विधायक हैं। जबकि कांग्रेस समर्थित जेडीएस के पास बहुमत का आंकड़ा है। इसके बाद भी राज्यपाल ने अल्पमत वाली पार्टी को सरकार बनाने के लिए कैसे बुलाया।

राज्यपाल के इस फैसले के खिलाफ कांग्रेस ने बुधवार को रात के साढ़े दस बजे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कांग्रेस ने इस शपथ ग्रहण पर रोक लगाने के गुहार सुप्रीम कोर्ट से की थी। रात के तकरीबन सवा एक बजे से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। तीन जजों की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी। रात भर सुप्रीम कोर्ट जागा रहा। रात भर सुनवाई होती रही।

जिसके बाद सुबह तकरीबन सवा 6 बजे सुप्रीम कोर्ट के जजों ने कहा कि वो शपथ ग्रहण को नहीं रोक सकते। लेकिन इस याचिका पर आगे भी सुनवाई हो सकती है। इस मामले में दोनों पक्षों को नोटिस जारी करते हुए विधायकों की लिस्ट सौंपने के लिए कहा गया है।

सुप्रीम कोर्ट में कर्नाटक के मुद्दे पर शुक्रवार को साढ़े दस बजे फिर सुनवाई होगी। तबतक बीजेपी को अपने सभी विधायकों की लिस्ट सुप्रीम को सौंपनी होगी। जिसमें उसे ये भी दिखाना होगा कि उसके पास बहुमत के लिए जरूरी आंकड़ा मौजूद है।

कर्नाटक चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। उसके पास 104 विधायक हैं। लेकिन बहुमत का आंकड़ा 112 है। जबकि कांग्रेस- जेडीएस गठबंधन के पास 116 विधायक हैं। यानि बहुमत से 4 विधायक ज्यादा है गठबंधन के पास।

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