गोड्डा: श्मशान काली की आराधना के लिए उमड़ी भक्तों की भीड़

गोड्डा: श्मशान काली की आराधना के लिए उमड़ी भक्तों की भीड़

गोड्डा/झारखंड:  इसबार की तिथि और तारीख का संयोग कुछ इस तरह का है कि काली पूजा दिवाली से एक दिन पहले हुई। यानि शनिवार को काली पूजा की गई। मां काली की आराधना के लिए मंदिर में शाम के बाद से ही लोगों का आना शुरु हो गया था। जो देर रात तक जारी रहा।

दिवाली के वक्त काली पूजा के अवसर पर गोड्डा के इस श्मशान काली मंदिर में दूर दराज से औघड़ और तांत्रिक भी सिद्धि प्राप्ति के लिए आते हैं। इस काली स्थान की खासियत ये है कि ये शहर की भीड़भाड़ से हटकर एकांत में है। आमजन भी यहां अपने मन को शांत करने के लिए आते हैं।

मान्यता है कि मां काली की आराधना से जहां एक तरफ मनुष्यों के मन में बैठा भय खत्म होता है वहीं इनकी पूजा से लोग रोग मुक्त भी होते हैं। राहु और केतु की शांति के लिए मां काली की उपासना अचूक है। मां अपने भक्तों की रक्षा करके शत्रुओं का नाश करती हैं। इनकी पूजा अर्चना से तंत्र-मंत्र का असर खत्म हो जाता है।

आमतौर पर मां काली की पूजा दो तरह से की जाती है। एक सामान्य तरीके से और दूसरा तंत्र साधना। सामान्य पूजा कोई भी आम इंसान कर सकता है। लेकिन तंत्र पूजा बिना किसी गुरु के संरक्षण और निर्देश के नहीं की जा सकती है। काली की उपासना का सही समय मध्य रात्री का होता है। इनकी पूजा में लाल और काले वस्तुओं का विशेष महत्व होता है। मां काली के मंत्र जाप से ज्यादा इनका ध्यान करना उपयुक्त होता है।

मां काली की उपासना शत्रु और विरोधी को शांत करने के लिए की जाती है। अगर आप भी अपने शत्रुओं से परेशान हैं तो इस तरह से आप काली की आराधना कर सकते हैं।

लाल वस्त्र धारण कर लाल आसन पर बैठें। मां काली के समक्ष दीपक और गुग्गल की धूप जलाएं। मां को प्रसाद में पेड़े और लौंग चढ़ाएं। इसके बाद ऊं क्रीं कालिकायै नम: का 11 बार माला जाप कर शत्रु और केस मुकदमे से मुक्ति की प्रार्थना करें। मंत्र जाप के बाद 15 मिनट तक पानी नहीं छुएं। यह अर्चना लगातार 27 रातों तक करें। ऐसी मान्यता है कि इन उपायों को करके आप मां काली का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

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