बिहपुर: 120 घंटे बीत गए, कब गिरफ्तार होगा आशुतोष की हत्या का आरोपी दारोगा रंजीत मंडल?

बिहपुर/नवगछिया:  शनिवार यानि 24 अक्टूबर को बिहपुर थानाक्षेत्र के मड़वा गांव में आशुतोष पाठक नाम के युवक को पुलिस ने इतनी बेरहमी से पीटा कि उसकी मौत हो गई। इस मामले में बिहपुर थाना के एसएचओ रंजीत मंडल समेत चार पुलिसकर्मियों पर उसे बुरी तरह से पीटने का आरोप लगा। इनके खिलाफ 302 के तहत केस भी दर्ज किया गया। लेकिन 120 घंटे बीत जाने के बाद भी इनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है। बताया ये जा रहा है कि आरोपी दारोगा रंजीत मंडल फरार हो गया है। रंजीत मंडल की फरारी ने पुलिस के मंसूबे पर सवाल खड़ा कर दिए हैं।

सवाल ये किये जा रहे हैं कि क्या बिहार पुलिस इतनी लाचार हो गई है कि हत्या का आरोपी उसका ही एक दारोगा गायब हो गया और पूरा महकमा उसे 120 घंटों बाद भी नहीं ढूंढ सका है? रंजीत मंडल की वजह से पूरी बिहार पुलिस के वर्दी पर जो कलंकित टीका लगा है उसे साफ करने या उस दाग के निशान को फीका करने के बजाय पुलिस उस दाग के साथ सामंजस्य बिठाकर अपने महकमे को ऐसे जघन्य कृत्य करने की मौन स्वीकृति देने का मन बना चुकी है? क्या पुलिस ये मान चुकी है कि ये उसका अधिकार है कि वो जिसे चाहे, जब चाहे, जहां चाहे वहां से उठा ले और अपनी मर्जी के मुताबिक जितना चाहे पीट सकती है? अगर पुलिस की इस क्रूरता में एक निर्दोष की मौत भी हो जाए तो भी उसे जायज ठहरा दे और मामले के शांत होने तक एक आरोपी दारोगा को फरार बताकर आनेवाले समय का इंतजार करे?

इसकी दूसरी तरफ आशुतोष के लिए इंसाफ की मांग लगातार जोर पकड़ रही है। सोशल मीडिया पर #JusticeForAshutosh हैशटैग के साथ आम जनता इंसाफ की लड़ाई को आगे बढ़ा रहे हैं। इंसाफ की इस मुहिम में रोजाना नए अध्याय जुड़ रहे हैं। रोजाना लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। लेकिन इतने के बावजूद बिहार पुलिस अबतक हत्या के उस आरोपी दारोगा को ढूंढ नहीं पाई या यूं कहें ढूंढना नहीं चाहती जिसने एक हंसते खेलते परिवार को उजाड़ दिया। एक पत्नी से उसका सुहाग छीन लिया, एक बच्ची के सिर से उसके पिता का साया छीन लिया। एक भाई से उसका भाई छीन लिया और दोस्तों की मंडली में शामिल एक हंसते खिलखिलाते नाम के आगे स्वर्गीय लगा दिया।

क्या है पूरा मामला?

24 अक्टूबर 2020 यानि जिस दिन नवरात्र की अष्टमी तिथि थी आशुतोष अपने पुश्तैनी गांव मड़वा दुर्गा दर्शन करने गया था। माता के दर्शन कर वो अपनी पत्नी और बच्ची के साथ वापस अपने घर भागलपुर लौट रहा था। इसी दौरान मड़वा गांव में चौक पर बेरिकेड हटाने को लेकर आशुतोष की किसी से कहासुनी हो गई। नोंकझोंक दो पक्षों में हो रही थी। इसी बीच पुलिस की इंट्री हुई। हो सकता है पुलिस के साथ भी कुछ गरमा गरमी हुई हो।

परिजनों के मुताबिक इसके बाद बिहपुर एसएचओ रंजीत मंडल और उसके साथ मौजूद पुलिसकर्मियों ने आशुतोष को पीटना शुरु कर दिया। जब इतने से दिल नहीं भरा तो उसे थाने लाया गया। औऱ हाजत में उसके साथ क्रूरता की सारी हदों को पार कर दी गई। उसके शरीर पर बने निशान पुलिस की हैवानियत की कथा बयां कर रहे थे। आरोप के मुताबिक पुलिस ने इतनी क्रूरता से पिटाई की कि उसकी हालत बिगड़ गई। हाजत में ही उसे खून की उल्टी हुई। लेकिन परिजनों को उससे मिलने नहीं दिया गया। हालत गंभीर होने के बाद 25 अक्टूबर की रात तकरीबन एक बजे आशुतोष को परिजनों को सौंपा गया। जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया लेकिन वहां उसकी मौत हो गई।

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