गोड्डा: इतने के बाद भी नहीं जागे तो आप बीमार हो जाएंगे, Video

गोड्डा/झारखंड:  स्वच्छता का मतलब समझाने और अपने परिवेश को स्वच्छ और स्वस्थ रखने के लिए सरकार करोड़ों-अरबों रुपये खर्च कर रही है। विज्ञापन, नुक्कड़ नाटक, प्रचार-प्रसार के माध्यम से जनता को ये बताने की कोशिश की जा रही है कि आप अपने आसपास कचरा न फैलाएं। जिस तरह से आप अपने घर को साफ रखते हैं उसी तरह से सड़कों को भी साफ रखें।

लेकिन अफसोस इस बात का है कि आज भी ज्यादातर लोग सफाई के लिए सरकार पर निर्भर हैं। और लानत इस बात की है कि आजादी के 7 दशक के बाद भी लोगों को ये बताने के लिए कि किस तरह से वो खुद को साफ सुथरा रखें इसके लिए करोड़ों-अरबों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।

दरअसल लोगों की ये मानसिकता है कि सफाई की जिम्मेदारी सरकार की है। हो सकता है इस बात पर कई लोगों को आपत्ति हो। लेकिन एकबार खुद से ये सवाल कर के देखें कि क्या आपने सड़क किनारे या सड़क पर कचरा फैलाने से पहले ये सोचा कि ऐसा करना गलत है। क्या इमानदारी से आप ये स्वीकार कर सकते हैं कि आपने कभी यत्र-तत्र कचरा नहीं फेंका।

अगर लोगों से ये सावल किया जाए कि उन्होंने पानी पीने के बाद उस बोतल का क्या किया तो शायद 80 फीसदी लोगों का जवाब होगा कि उन्होंने उसे सड़क किनारे फेंक दिया। अब आप ही बताइये क्या ये भी सरकार की जिम्मेदारी है कि वो आपके कचरे को उठाने के लिए आपके पीछे-पीछे चलती रहे। जवाब होगा नहीं। क्योंकि पानी की बोतल को सही जगह पर फेंकना आपकी जिम्मेदारी है।

किसी एक व्यक्ति या एक सरकार के चाह लेने से कुछ भी नहीं बदलेगा। स्वच्छता का सपना तब साकार होगा जब हम आप और हम सब मिलकर इमानदारी के साथ इसके लिए कोशिश करेंगे। हो सकता है कोई पैकेट या पानी की बोतल जो खाली हो चुकी है उसे फेंकने के लिए आपको हर जगह डस्टबिन ना मिले। लेकिन आप इतना तो कर ही सकते हैं कि उस खाली पैकेट या पानी की खाली बोतल को अपने साथ किसी थैले में रख लें और सही जगह देखकर उसे फेंकें।

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