गोड्डा: कोयला खदान के निजीकरण के खिलाफ दीपिका पांडे सिंह ने खोला मोर्चा

गोड्डा/झारखंड:  कोल ब्लॉक के निजीकरण के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ आंदोलन तेज हो गया है। झारखंड में केंद्र सरकार के इस फैसले के खिलाफ मजदूर यूनियन की तरफ से तीन दिनों के हड़ताल का ऐलान किया गया है। जिसका असर भी कोल ब्लॉक में दिख रहा है। लगातार दूसरे दिन महागामा स्थित ईसीएल में कोई कामकाज नहीं हुआ। यही हाल झारखंड के दूसरे कोयला खदानों में भी है।

इस मुद्दे पर महागामा से कांग्रेस विधायक दीपिका पांडे सिंह ने भी मोर्चा खोल दिया है। निजीकरण के फैसले के खिलाफ आंदोलन कर रहे मजदूरों के समर्थन में कांग्रेस विधायक उतर गई हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का ये फैसला मजदूर विरोधी है। इससे एक तरफ बेरोजगारी बढ़ेगी दूसरी तरफ मजदूरों का शोषण बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जो फैसला लिया है वो एकतरफा है जबकि इसमें सभी को विश्वास में लेकर पहल की जानी थी। उन्होंने आगे कहा मजदूरों के हित में ही पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण किया था। लेकिन मोदी सरकार ने निजीकरण का फैसला कर ये साफ कर दिया है कि वो केवल पूंजीपतियों की सरकार है।

क्या है मामला?

केंद्र सरकार ने पांच राज्यों झारखंड, ओडीशा, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के 41 कोल ब्लॉक के निजीकरण का फैसला किया है। जिसका विरोध किया जा रहा है और मजदूर यूनियन की तरफ से इस फैसले के खिलाफ तीन दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया गया है।

झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने भी इस निजीकरण का विरोध किया है। और इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील भी की है। सीएम हेमंत सोरेन का कहना है कि केंद्र सरकार को इस फैसले से पहले राज्यों से सहमति बनानी चाहिए थी। राज्य की कुल 9 कोल खदानों के निजी हाथों में देने की योजना केंद्र सरकार की है।

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