गोड्डा यानि वो शहर जहां के लोगों की चिंता पेड़ के पत्ते हिलने से बढ़ जाती है

गोड्डा/झारखंड:  बात जरा अटपटी लग सकती है कि भला पेड़ के पत्तों के हिलने से गोड्डा वासियों की चिंता क्यों बढ़ जाती है? लेकिन ये हकीकत है और इसी हकीकत के साथ संघर्ष कर गोड्डा की जनता कई दशकों से जी रही है। दरअसल यहां चिंतित होने की मुख्य वजह हल्की और मंद गति से बहने वाली हवा नहीं है बल्कि चिंता की असली वजह है यहां की बेहद ही घटिया हो चुकी बिजली व्यवस्था।

जिले में बिजली आपूर्ति को अगर एक वाक्य में समझना हो तो कहा जा सकता है कि यहां 24 घंटे में अगर 8-10 घंटे भी बिजली मिल जाए तो समझिये ऊपरवाला आप के ऊपर मेहरबान है। वर्ना गोड्डा वासियों का दिन तीन-चार शब्दों को सुनते हुए ही गुजरता है। जिसमें से एक है धनकुंडा, दूसरा है शटडाउन, तीसरा है ब्रेक डाउन, चौथा है 33000 KV, पांचवां और आखिरी है तार का टूट जाना।

यही वो पांच शब्द हैं जिसके बारे में पूरे जिले में सबसे ज्यादा चर्चा होती है और इन्हीं शब्दों को चर्चा में लाकर बिजली विभाग के बाबू (केवल गोड्डा वाले बिजली बाबू ही नहीं बल्कि इसमें दुमका और देवघर के बड़े वाले बिजली बाबू भी शामिल हैं) अपनी कामचोरी और निकम्मेपन पर काम के प्रति वफादारी का वो लेप चढ़ाते हैं जिसे दिखाकर ऊपर तक ये संदेशा पहुंचाया जाता है कि हम तो कोशिश कर रहे हैं लेकिन बिजली आपूर्ति में कमीं की वजह प्राकृतिक विपदा है।

पिछले दिनों 6 जून को बिजली विभाग के इस निकम्मेपन ने तब अपनी सारी मर्यादा तोड़ दी जब रांची से चलकर गोड्डा पहुंचे JBVNL के एमडी राहुल पुरवार के सामने विभाग के बाबुओं ने कागजी कामकाज का वो चक्रव्यूह रचा जिसमें फंसकर पुरवार साहब ने ये आश्वासन दे दिया था कि 11 को जुलाई से डबल सर्किट शुरु हो जाएगा, और अगस्त तक नई ग्रिड से बिजली आपूर्ति होने लगेगी। जिसके बाद गोड्डा की बिजली व्यवस्था में अप्रत्याशित सुधार देखने को मिलेगी। लेकिन सुधार तो तब होती न जब पुरवार साहब को विभाग की तरफ से सही जानकारी दी गई होती। विभाग ने एमडी राहुल पुरवार को गुमराह करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

लेकिन पुरवार साहब की गाड़ी ने गोड्डा की चौहद्दी पार भी नहीं की थी कि बिजली विभाग अपने असली रंग में आ गया। 7 जुलाई से मनमाना बिजली कटौती शुरु हो गई, दिनभर इस बहाने बिजली कटी रहती है कि मेंटेनेंस का काम किया जा रहा है, शटडाउन भले ही तीन घंटे का लिया जाए लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं कि एक बार बिजली कटने के बाद उसके दर्शन कब होंगे।

हालात ये हो चुके हैं कि अगर पेड़ का पत्ता भी हिलता हुआ दिख जाए बिजली बाबू को तो शटडाउन ले लिया जाता है। उसके बाद संदेश ये फैलाया जाता है कि धनकुंडा से 33 हजार केवी ब्रेक डाउन है, पेट्रोलिंग कार्य जारी है। यही वजह है कि कहा जाने लगा है कि पेड़ का पत्ता हिला और बिजली कटी। उसमें अगर हवा का वेग ज्यादा हुआ मसलन हवा से अगर तूफान टाइप का एहसास होने लगे तब तो मान लीजिये आपका दिन और आपकी रात पंखा झलते ही गुजरेगा। क्योंकि जिस जिले में बिजली केवल पत्ता हिलने के बाद घंटों काटी जाती है वहां अगर आंधी आ जाए तब तो 7-8 घंटे बिजली काटना वाजिब ही है।

दरअसल 6 जून की मीटिंग में बिजली विभाग और इससे जुड़ी एजेंसियों के लोग जितना झूठ बोल सकते थे बोले। उस बैठक में सांसद निशिकांत दुबे भी मौजूद थे उन्होंने विभाग के झूठ पर सवाल भी उठाया थे लेकिन उसपर विभाग तनिक भी शर्मिंदा नहीं हुआ क्योंकि वो मान रहा था कि झूठ तो हम आज भी बोल रहे हैं।

गोड्डा के लिए डबल सर्किट लाइन जिसे 11 जून को शुरु होना था वो डेडलाइन फेल हो चुका है। उसमें हफ्ते भर की देरी बताई जा रही है। लेकिन हफ्ता अगर महीना या साल में बदल जाए तो हैरानी नहीं होगी क्योंकि इस डबल सर्किट का काम सालों से चलता आ रहा है और अभी भी चल ही रहा है।

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