गोड्डा निकाय चुनाव: कुल 63 फीसदी वोट पड़े, अब 20 अप्रैल का इंतजार

गोड्डा/झारखंड:  गोड्डा निकाय चुनाव आज संपन्न हो गया। दिनभर पोलिंग बूथ पर मतदाताओं की लंबी कतार देखने को मिली। लेकिन कुछ बूथ ऐसे भी थे जहां पर गर्मी की वजह से दोपहर के वक्त मतदाता नहीं के बराबर थे। निकाय चुनाव में कहीं भी किसी तरह की अप्रिय घटना की खबर अबतक नहीं आई है। गोड्डा निकाय चुनाव में 63 फीसदी वोटिंग हुई। ये आंकड़ा पिछले चुनाव से ज्यादा है। 2013 में हुए चुनाव में 58.82 फीसदी वोट पड़े थे।

शहर में 36 मतदान केंद्र बनाए गए थे। जिनपर सुबह 7 बजे से शाम के 5 बजे तक वोटिंग हुई। कुछ बूथों पर लोगों की लंबी कतार की वजह से शाम के साढ़े बजे तक वोटिंग हुई। जानकारी के मुताबिक वार्ड नंबर 21 में उत्क्रमित मध्य विद्यालय शिवाजी नगर में सुरक्षाकर्मी और पार्टी कार्यकर्ताओं में हल्की नोंकझोंक हुई। लेकिन बाद में स्थिति को संभाल लिया गया।

वार्ड नंबर 14 में मतदान करते वक्त चेहरे से बुर्का हटाने के लिए कहने पर थोड़ा बहुत शोर शराबा हुआ। लेकिन तुरंत ही मामले को रफा दफा कर दिया गया। कुल मिलाकर कहीं भी कोई बड़ी अप्रिय घटना नहीं हुई।

 

ये पहली बार है जब नगर परिषद का चुनाव पार्टी के सिंबल पर लड़ा जा रहा है। इसलिए इसमें बड़ा पार्टियों के नेताओं की साख भी दांव पर लगी ही। एक तरफ बीजेपी की तरफ से वर्तमान नगर पंचायत अध्यक्ष अजीत सिंह अध्यक्ष पद के उम्मीदवार थे। उनकी जीत मौजूदा विधायक अमित मंडल को जननेता का सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए जरुरी है। कहा यहां तक जा रहा है कि अगले साल होनेवाले विधानसभा चुनाव में अमित मंडल की टिकट की दावेदारी काफी हद तक अजीत की जीत या हार पर निर्भर करेगी।

दूसरी तरफ कांग्रेस की तरफ से जिला अध्यक्ष दीपिका पांडे सिंह ने अपनी तरफ से एड़ी चोटी का जोर लगा रखा था। हर गली हर वार्ड में चुनाव प्रचार के दौरान लोगों से जनसंपर्क करते देखी गईं। पूर्व सांसद फुरकान अंसारी की टिकट की दावेदारी भी कांग्रेसी उम्मीदवार के जीत हार पर निर्भर है। क्योंकि इसबार चुनाव में मुस्लिम, ब्राह्मण और अन्य जाति का समीकरण काफी प्रबल रहा। अभी भी ये साफ नहीं है कि नगरपरिषद का ऊंट किस करवट बैठेगा।

अनिश्चिता के ये हालात इसलिए भी बने हैं क्योंकि इसबार एक निर्दलीय उम्मीदवार बालटी लेकर चुनाव लड़ने निकला था। पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार भले ही खुलकर कबूल ना करें लेकिन मन के भीतर ये डर जरुर था कि कहीं बालटी उनका खेल ना बिगाड़ दे।

अब तो जो होना था वो हो चुका है। अब इंतजार 20 अप्रैल का है। जब चुनाव के नतीजे आएंगे।

Loading...