गोड्डा: भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल के खिलाफ सरकार को विपक्ष की बड़ी चुनौती

गोड्डा/झारखंड:  भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल के विरोध में विपक्ष अपनी एकजुटता से सरकार के सामने चुनौती पेश करने के लिए राजधानी से लेकर जिला मुख्यालयों तक में धरना और बैठकों का सहारा ले रही है। विपक्ष की मांग है कि जबतक सरकार इस बिल को वापस नहीं लेती है उनका आंदोलन जारी रहेगा। इसे लेकर की तैयारी कई चरणों में चल रही है। जिसमें हर जिले में अपनी विरोध की मशाल लेकर विपक्षी नेता एक मंच पर नजर आ रहे हैं।

इसी क्रम में सोमवार को गोड्डा में तमाम विपक्षी दलों ने धरना दिया। जिसमें पोड़ैयाहाट से जेवीएम विधायक प्रदीप यादव ने कहा बीजेपी सरकार  गरीब विरोधी है, सिर्फ चंद पूंजीपति की ये सरकार  है। गरिब किसानों की जमीन कैसे अडानी-अंबानी के हाथों बेची जाए, इसी के लिये ये सरकार दिन रात चिन्तित है। इसलिये किसी भी किमत पर भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल लागू होने नहीं दिया जायेगा।

वहीं जेएमएम के राजेश मंडल ने कहा हमें अपना हक़ लेने के लिये,हेमन्त सोरेन जी के निर्देश का पालन करते हुए भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल का विरोध करना है। 5जुलाई को विपक्ष के आह्वान पर हम  कार्यकर्ताओं को गोड्डा में ऐतिहासिक बन्दी करानी है।

भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल के खिलफ राज्य के तमाम विपक्षी दलों ने 5 जुलाई को महाबंद बुलाया है। जिसके लिए अभी से ही विपक्ष की तरफ से जनता से ये अपील की जा रही है कि उनके इस महाबंद का समर्थन करें।

दूसरी तरफ सरकार है जिसका मानना है कि भूमि अधिग्रहण को लेकर जो संशोधन किये गए हैं वो भूमि मालिकों के लिए फायदेमंद है। इसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि अब भूमि मालियों को मुआवजा के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

सरकार ने भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल में भू अर्जन के सामाजिक प्रभाव के आकलन को हटा दिया है। लेकिन संशोधन बिल में ये भी स्पष्ट है कि निजी उपयोग या निजी उद्योगों के लिए जमीन नहीं ली जा सकेगी। संशोधन बिल में साफ तौर पर कहा गया है कि स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, अस्पताल, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, रेल, सड़क जलमार्ग, विद्युतीकरण, सिंचाई, अफोर्डेबल हाउसिंग, जलापूर्ति लाइन और सरकारी भवन निर्माण के लिए जमीन ली जा सकेगी।

साथ ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज होने से जमीन मालिकों को मुआवजे के लिए लंबा इंतजार नहीं करना होगा। सरकार का मानना है कि अधिग्रहण शीघ्र होने से मुआवजे के भुगतान आठ महीने तक कर दिया जाएगा। राज्यपाल ने इस संशोधन बिल को इसी महीने मंजूरी दी है।

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