गोड्डा: कस्तूरबा की घटना राजनीतिक, लड़की के बयान में सत्यता नहीं- उपायुक्त

गोड्डा/झारखंड:  कस्तूरबा विद्यालय का मुद्दा इन दिनों गर्म है। इसमें नक्सली के शामिल होने की बात कही जा रही है। लेकिन प्रशासन की तरफ से एक बार फिर साफ किया गया है कि कस्तूरबा की घटना केवल सियासी मुद्दा है। डीसी किरण कुमारी पासी ने साफ किया है कि कस्तूरबा विद्यालय में किसी नक्सली के शामिल होने की बात करना केवल एक कल्पना है। इसमें कोई सत्यता नहीं है। इसकी जांच अलग अलग स्तर पर की जा चुकी है।

पीड़ित लड़की के बयान पर डीसी का कहना है कि उसके बयान में सत्यता कम और विरोधाभाष ज्यादा है। साथ ही उन्होंने कहा कि लड़की जो बयान दे रही है उसकी सत्यता की पुष्टि स्कूल के किसी और श्रोत से नहीं हो रही है। उपायुक्त का कहना है कि लड़की ने जो बयान दिया है उसकी जांच की गई है। जिसमें सत्यता नहीं दिख रही है। इस मामले पर स्कूल की दूसरी छात्राओं और शिक्षिकाओं से भी बात की जा चुकी है।

डीसी ने कहा कि लड़की जो बयान दे रही है वो किसी नाटक की तरह है। जिसे बनाकर सामने प्रस्तुत किया जा रहा है।

कस्तूरबा में सुरक्षा इंतजामों में कमीं की बात भी सामने आई थी। जिसके बाद अब प्रशासन की तरफ से कस्तूरबा विद्यालय में उन कमियों को दूर करने की दिशा में काम किया जा रहा है। उपायुक्त के मुताबिक विद्यालय में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, चहारदीवारी का निर्माण किया जा रहा है, नाइट गार्ड्स की नियुक्ति की जा चुकी है। किसी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक लगाई जाएगी। यहां पर ये सवाल जरुर बनता है कि ये सारे इंतजाम पहले क्यों नहीं किये गए।

कस्तूरबा में पढ़ाने वाले वैसे शिक्षक जो पढ़ाई के काम में कम और राजनीती में ज्यादा सक्रिय हैं या विद्यालय में भय का माहौल बना रहे हैं उनकी पहचान कर उनकी छुट्टी की जाएगी। प्रशासन का मानना है की स्थानीय राजनीति की वजह से आज कस्तूरबा का ये मामला सामने आया है।

क्या है मामला?

दरअसल कस्तूरबा का मामला तब सुर्खियों में आया जब वहां के हॉस्टल में रह रही एक लड़की ने अपने बयान में बताया कि उसने रात के वक्त स्कूल में किसी महिला को देखा। जिसने काले रंग के कपड़े पहन रखे थे, जूते पहन रखे थे, उसके हाथ में हथियार भी थे। लड़की के बयान के मुताबिक संदिग्ध महिला लड़की को अपने साथ ले जाना चाहती थी। पीड़ित लड़की से महिला के द्वारा नाम और पता भी पूछा गया था। लेकिन उसने अपना नाम पता गलत बताया था। लड़की ने कहा था उस महिला के देखने के बाद वो काफी डर गई और फिर फर्श के पानी पर उसका पैर फिसल गया और वो बेहोश हो गई। पीड़ित लड़की के मुताबिक उसे हॉस्टल के वॉर्डन की तरफ से इस घटना का जिक्र किसी से नहीं करने के लिए कहा गया था।

लड़की के इस बयान के सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ा। शुक्रवार को जिला परिषद की बैठक में इस मामले को पोड़ैयाहाट के विधायक प्रदीप यादव की तरफ से उठाया गया। उस बैठक में भी किसी नक्सली के शामिल होने की बात उपायुक्त की तरफ से खारिज की गई थी।

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