गोड्डा की सड़कों पर फिर गूंजा बिजली-पानी का मुद्दा JMM ने निर्दोषों के केस वापस लेने की मांग की

गोड्डा/झारखंड:  जिला झारखंड मुक्ति मोर्चा गोड्डा के द्वारा अशोक स्तंभ गोड्डा में एक दिवसीय धरना का कार्यक्रम तथा नगर भ्रमण कर महिलाओं के द्वारा खाली घड़ा लेकर तथा पुरुषों के द्वारा डिबीया को लेकर झारखंड सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। जेएमएम की तरफ से उपायुक्त गोड्डा को 15 जून को ही ये अल्टीमेटम दिया गया था कि 17 जून तक गोड्डा नगर के साथ-साथ समस्त जिला में विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था को सुदृढ़ करें तथा चापाकल मरम्मत एवं नए चापाकलों का अधिष्ठापन के लिए ठोस निर्णय लें, अन्यथा 18 जून को 1दिन का धरना एवं नगर भ्रमण कर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेगी।

साथ ही गोड्डा नगर में बिजली आपूर्ति 24 घंटा में 1 घंटा भी नहीं देने के विरोध में गोड्डा के नागरिकों के द्वारा जो प्रदर्शन किया गया था उसका राजनीतिकरण कर किसी खास वर्ग एवं दल के लोगों के ऊपर गोड्डा पुलिस ने केस दर्ज की है। पार्टी के इस धरना कार्यक्रम में भी निर्दोषों के ऊपर दर्ज केस वापस लेने की् मांग की गई। इस सिलसिले में लिखित रूप से ज्ञापन उपायुक्त गोड्डा को पार्टी के द्वारा दिया गया और मांग की गई कि उसे अतिशीघ्र वापस किया जाए।

इसपर उपायुक्त महोदया ने आश्वस्त किया है कि निश्चित रूप से इस दिशा में ठोस पहल की जाएगी। धरना और विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम की अध्यक्षता रविंद्र महतो जिला अध्यक्ष झारखंड मुक्ति मोर्चा की अगुवाई में किया गया।

आंदोलनकारियों पर केस के खिलाफ नगर परिषद में बैठक

बिजली आंदोलन से जुड़े आंदोलनकारियों के खिलाफ केस को लेकर नगर परिषद में भी सोमवार को बैठक की गई थी। जिसमें नगर अध्यक्ष जीतेंद्र कुमार ने कहा बिजली के लिए आंदोलन करनेवाले निर्दोष लोगों पर केस करना निंदनीय है। उन्होंने कहा कि अगर केस वापस नहीं लिया जाता है तो निगम के तमाम पार्षद जेल भरो अभियान चलाएंगे और थाने में जाकर अपनी गिरफ्तारी देंगे।

क्या है मामला

दरअसल 14 जून को बिजली की घटिया आपूर्ति को लेकर करगिल चौक पर दोपहर के वक्त सड़क जाम किया गया था। जिसे सांसद निशिकांत दुबे ने भी अपना समर्थन दिया था। उसी दौरान बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता गोपाल बर्णवाल की तरफ से लिखित रुप में दिया गया था कि रोजाना 16-18 घंटे बिजली की आपूर्ति की जाएगी। इसके बाद सड़क जाम खत्म कर दिया गया और सबकुछ सुचारू रूप से चलने लगा। इस वक्त तक कहीं किसी तरह की तोड़फोड़ नहीं की गई थी। लेकिन बिजली का आनाजाना जारी रहा।

उसके बाद उसी दिन यानि 14 जून को ही रात के तकरीबन 8 बजे असनबनी चौक पर बिजली के मुद्दे पर ही सड़क जाम किया गया। कुछ घंटों बाद बिजली दफ्तर में तो़ड़फोड़ और आगजनी भी की गई थी। इसके बाद करगिल चौक पर फिर से सड़क जाम किया गया। जो तकरीबन आधी रात तक चला।

इसी सिलसिले में प्रशासन की तरफ से आंदोलनकारियों पर केस दर्ज किया गया है। जिसके बारे में आंदोलन में शामिल लोगों का कहना है कि जो लोग तोड़फोड़ और आगजनी के दोषी हैं उनके खिलाफ प्रशासन कार्रवाई करे लेकिन जो निर्दोष हैं और जिन्होंने किसी तरह की तोड़फोड़ या हिंसा नहीं की उनपर केस क्यों दर्ज किया गया है। उनके केस वापस लिये जाएं।

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