गोड्डा: महाष्टमी पर देवी दुर्गा के महागौरी रूप की पूजा, Video

गोड्डा/झारखंड: महाष्टमी पर सुबह से ही मां दुर्गा के मंदिरों की अलग छटा दिख रही है। हाथों में अपने मुरादों की थाल लेकर भक्त मां के सामने खड़े हैं और मैया से अपनी मन की मुराद पूरी करने की कामना कर रहे हैं। महाष्टमी पर मां दुर्गा के महागौरी रुप की पूजा होती है।

ऐसी मान्यता है कि मां के इस रुप की पूजा करने से हर तरह के सिद्धियों पर विजय प्राप्त होती है। महागौरी आदि शक्ति हैं इनके तेज से संपूर्ण विश्व प्रकाशमान होता है। इनकी शक्ति अमोघ फलदायिनी है। महागौरी की आराधना से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं। महागौरी की आराधना से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और भक्त जीवन में पवित्र और अक्षय पुण्यों का अधिकारी बनता है।

देवी दुर्गा के नौ रुपों में महागौरी आठवीं शक्ति स्वरूपा हैं। दुर्गा सप्तशती में शुंभ निशुंभ से पराजित होकर देवतागण गंगा के तट पर जिस देवी की आराधना कर रहे थे वह महागौरी ही थीं। देवी गौरी के अंश से ही कौशिकी का जन्म हुआ जिसने शुंभ निशुंभ के प्रकोप से देवताओं को मुक्त कराया।

अष्टमी के दिन सुहागन महिलाएं अपने सुहाग की रक्षा के लिए मां गौरी को लाल चुनरी चढ़ाती हैं। ऐसी मान्यता है कि गौरी ने कठिन तपस्या के बाद शिवजी को वर के रुप में प्राप्त किया था। मां गौरी का वाहन बैल और उनका शस्त्र त्रिशूल है। माता गौरी के पूजा करने से भक्तों के सभी पाप धुल जाते हैं। इस दिन माता के चित्र के सामने दीपक जलाएं और उन्हें रोली लगाएं। अष्टमी की पूजा से सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है और मां अपने भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं।

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