गोड्डा: सप्तमी को मंदिरों के खुले कपाट, उमड़ा भक्तों का हुजूम

गोड्डा/झारखंड:  शारदीय नवरात्र के सप्तमी के दिन अलग अलग दुर्गा मंदिरों के खुले कपाट खुलने के साथ ही श्रद्धालुओं का जन सैलाब उमड़ पड़ा।  जिले के विभिन्न पूजा पंडालों में बेलवरण आगमन के साथ ही मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई। इसके साथ ही भक्तों की भारी भीड़ मां के दर्शन को उमड़ पड़ी है। मां के दर्शन के लिए महिलाओं और बच्चों की भीड़ काफी संख्या में देखने को मिल रहे है।

नवरात्र में सातवें दिन मां दुर्गा के कालरात्रि रूप की पूजा की जाती है। ये काल का नाश करने वाली हैं, इसलिए कालरात्रि कहलाती हैं। कहा जाता है इस दिन साधक को अपना चित्त भानु चक्र (मध्य ललाट) में स्थिर कर साधना करनी चाहिए। संसार में कालों का नाश करने वाली देवी ‘कालरात्री’ ही है। कहते हैं इनकी पूजा करने से सभी दु:ख, तकलीफ दूर हो जाती है। दुश्मनों का नाश करती है और मनोवांछित फल देती हैं।

इसी कड़ी में जिले के प्राचीन व प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर महागामा तथा वरकोप में अहले सुबह बेलवरण पूजा की गई। तत्पश्चात भारी संख्या में महिला,पुरुष तथा बच्चों के द्वारा झाड़ू, दंडवत, तथा दूध,फूल,बेलपत्र एवं सिंदूर से महिलाओं द्वारा पूजन उपरांत चच्छु दान का कार्यक्रम हुआ चच्छु दान के बाद मां के प्रतिमा को मंदिर में स्थापित की गई।ज्ञात हो कि यह परंपरा संथाल परगना क्षेत्र में वर्षो पुरानी है जो राज मोल ब्रह्म के द्वरा चलाया गया था जो आज तक जारी है।

गोड्डा शहर के अलग अलग दुर्गा मंदिरों में सुबह से लेकर शाम को आरती के वक्त तक भक्तों की भीड़ लगी रही। यहां के बढौना दुर्गा मंदिर, सिनेमा हॉल चौक पर स्थित जय माता दी संघ, बड़ी दुर्गा मंदिर, गोढ़ी स्थित दुर्गा मंदिर और सरकंडा दुर्गा मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त मां की आरती में शामिल हुए।

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