गोड्डा: शिकायत लिखवाने थाने के चक्कर लगाता रहा युवक, मीडिया के सवाल पर बोलीं थाना प्रभारी ‘जो छापना है छाप दो’

गोड्डा/झारखंड:  शहर में बाइक चोरी होने की घटना नई नहीं है। बाइक चोरी होने की घटना पहले भी सामने आ चुकी हैं और सोमवार को भी आई। फर्क ये था कि सोमवार को जो बाइक चोरी हुई उसकी रिपोर्ट दर्ज करवाने के युवक को थाने के कई चक्कर लगाने पड़े। तब जाकर शाम के वक्त बमुश्किल उसकी शिकायत सुनी गई, लेकिन खबर लिखे जाने तक उसे किसी तरह की रिसीविंग नहीं दी गई थी।

मामला शहर के अंबेडकर नगर का है। जहां के ज्योति निवास में रहनेवाले वाला युवक विवेक कुमार जब सोमवार की सुबह साढ़े चार बजे ट्यूशन जाने के लिए बाइक निकालने गया तो देखा उसकी बाइक वहां नहीं है। जिसके बाद उसने आसपास बाइक की तलाश की लेकिन नहीं मिली। तब सुबह साढ़े पांच बजे वो नगर थाना में बाइक चोरी की रिपोर्ट दर्ज करवाने पहुंचा।

पीड़ित का आरोप है कि सुबह साढ़े पांच बजे उससे कहा गया कि वो 9 बजे आए। युवक के मुताबिक जब वो सुबह के 9 बजे अपनी रिपोर्ट दर्ज करवाने पहुंचा तो उससे 12 बजे आने को कहा। लेकिन जब दोपहर 12 बजे वो रिपोर्ट दर्ज करवाने पहुंचा तो वहां ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मी के तेवर ही बदले हुए थे। आरोप है कि थाने में उसे काफी बुरा भला कहा गया। जिसके बाद मायूस होकर वो वापस आ गया। पीड़ित के मुताबिक उस वक्त ड्यूटी पर तैनात मुंशी का नाम मुकेश यादव है। आखिरकार शाम के पांच बजे के करीब उसकी शिकायत ली गई।

जब थाना प्रभारी रेणु गुप्ता से इस मामले पर NTI की तरफ से प्रतिक्रिया मांगी गई तो उनके तेवर कड़क हो गए। तिरस्कार के स्वर में उन्होंने कहा आपको जो छापना है छाप दीजिये, जो लिखना है लिख दीजिये। थाने में कौन आया कौन गया इसपर नजर रखना मेरी जिम्मेदारी नहीं है। जब उनसे ये पूछा गया कि क्या ये आपका स्टेटमेंट है तो उनका कहना था कि स्टेटमेंट एसपी साहब देते हैं मैं नहीं देती। लेकिन एक मीडियाकर्मी के सामने उनके जो तेवर थे उसे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि सुबह से जो युवक अपनी रिपोर्ट लिखवाने के लिए थाने के चक्कर लगा रहा था उसके साथ क्या सलूक किया गया होगा।

काले रंग की ग्लैमर बाइक जिसका नंबर JH 17M 5569 है इसकी चोरी की जानकारी सोमवार को सुबह के चार बजे चली। पीड़ित का आरोप है कि रिपोर्ट लिखवाने के लिए थाने के कई चक्कर लगाने पड़े। इतने के बाद भी आधी रिपोर्ट लिखी गई। यानि शिकायत तो ले ली गई लेकिन किसी तरह की रिसीविंग नहीं दी गई।

अब सवाल ये उठता है कि अगर बाइक चोरी होने की एक रिपोर्ट लिखने में 12 घंटे लगते हैं और कल होकर उस बाइक से किसी वारदात को अंजाम दिया जाता है तो पुलिस पहले किसे गिरफ्तार करेगी। क्या इसमें पुलिस की लापरवाही नहीं है। पुलिस के इस रवैये के बाद आखिर कौन अपनी शिकायत लेकर थाने जाना चाहेगा। और तो और जब मीडिया ने पुलिस का पक्ष जानना चाहा तो थाना प्रभारी रेणु गुप्ता भड़क गईं। उन्होंने साफ साफ कह दिया ‘जो छापना है छाप दो।‘ वाह गोड्डा पुलिस।

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