गोड्डा: अडाणी पर आरोप लगानेवालों को बड़ा झटका, कंपनी को मिली संजीवनी, Video

गोड्डा/झारखंड:  अडाणी पावर प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहण की गई जमीन को लेकर एक तरफ सियासी हमले हो रहे हैं दूसरी तरफ वो रैयत हैं जिन्होंने कई मौकों पर ये साफ कर दिया है कि उन्होंने अपनी मर्जी से कंपनी को जमीन दी है। उनके साथ किसी तरह की जबरदस्ती नहीं की गई है। लेकिन इतने के बावजूद जमीन अधिग्रहण के तरीकों को लेकर सवाल उठने बंद नहीं हुए।

लेकिन अब इन आरोपों पर गोड्डा प्रशासन ने खुद सामने आकर ये साफ किया है कि अडाणी कंपनी के लिए जो जमीन का अधिग्रहण किया गया है उसमें किसी तरह की जोर जबरदस्ती नहीं की गई है। साथ ही ये भी बताया गया कि जमीन अधिग्रहण करने में हर नियम का पालन किया गया है।

इस मामले को लेकर अपर समाहर्ता अनिल कुमार तिर्की ने प्रेस कांफ्रेस की। जिसमें उन्होंने बताया कि नियम के मुताबिक किसी जमीन के अधिग्रहण के लिए 80 फीसदी रैयतों की रजामंदी जरुरी होती है। लेकिन अडाणी पावर प्रोजेक्ट के लिए गोड्डा के मोतिया, गंगटा, पटवा और माली मौजा में जो अधिग्रहण किया गया उसमें अबतक कुल 96.69 फीसदी रैयतों को मुआवजा मिल चुका है।

हाल के दिनों में माली मौजा में अधिग्रहण की गई जमीन को लेकर काफी विवाद हुआ था। जबकि हकीकत कुछ और ही है। माली मौजा में कुल 240 एवार्डी रैयत हैं जिनमें से 230 एवार्डी रैयतों ने मुआवजा ले लिया है। यानि माली मौजा में केवल 10 एवार्डी रैयत ऐसे हैं जिन्होंने मुआवजा नहीं लिया है। इन 10 रैयतों का मुआवजा कंपनी की तरफ सरकार के पास जमा करवाया जा चुका है। वो जब चाहें इसे ले सकते हैं। अगर फीसदी की बात करें तो माली मौजा में 95.83 फीसदी रैयतों को मुआवजा मिल चुका है।

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अपर समाहर्ता की तरफ से ये भी जानकारी दी गई कि पोड़ैयाहाट के गायघाट और सोनडीहा में जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जाएगा।

इन आंकड़ों के सामने आने के बाद अब ये साफ हो चुका है कि जबरन अधिग्रहण की जो कहानी नेताओं की तरफ से की जा रही है वो हकीकत की धरातल पर कहीं नहीं टिक रही है।

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