गोड्डा: अडाणी पावर प्रोजेक्ट से जुड़ी अफवाह और हकीकत पर NTI की पड़ताल, पार्ट-1

गोड्डा/झारखंड:  गोड्डा में बन रहे 1600 मेगावाट के अडाणी पावर प्रोजेक्ट का काम अभी शुरुआती चरण में है। जमीन के अधिग्रहण का काम तकरीबन पूरा हो चुका है और रैयतों को मुआवजे की राशी लगभग दी जा चुकी है। ऐसे वक्त में जब ये प्रोजेक्ट का काम अगले चरण की तरफ बढ़ रहा है उस वक्त कुछ सवाल सोशल मीडिया में सामने आ रहे हैं।

उन सवालों में ही ये भी शामिल है कि जिन किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया उसके बदले उन्हें धमकी और गालियां दी गई। इसी दावे की पड़ताल के लिए newstrendindia अडाणी पावर प्रोजेक्ट के मोतिया, गंगटा और पटवा मौजा में  ग्राउंड जीरो पर पहुंचा। मोतिया, गंगटा और पटवा मौजा के उन रैयतों से हमने बात की जिनकी जमीन इस प्रोजेक्ट के लिए ली गई है।

जिन रैयतों की जमीन ली गई है उसमें कुछ बड़े किसान हैं तो कई छोटे किसानों की जमीन का भी अधिग्रहण किया गया। NTI की तरफ से रैयतों से सीधा सवाल ये पूछा गया कि क्या जमीन लेने के लिए किसी तरह की जोर जबरदस्ती की गई। क्या उन्होंने अपनी मर्जी के बगैर जमीन इस पावर प्रोजेक्ट के लिए दिया। किसानों ने जबरन जमीन अधिग्रहण की  बात को सिरे से खारिज कर दिया।

जमीन अधिग्रहण पर रैयतों की जो प्रतिक्रिया है उसमें जबरदस्ती या मारपीट जैसे आरोपों को नकारा जा रहा है। इस बात पर रैयतों की राय एक है कि इस प्रोजेक्ट के आने से उनकी जीवन शैली में जरुर बदलाव आया है। सिंचाई के साधन की कमीं की वजह से जिस जमीन से नाम मात्र की कमाई होती थी अब उसे पावर प्रोजेक्ट को सौंपने में ही इन्होंने अपनी भलाई भी समझी।

मोतिया, गंगटा और पटवा मौजा के रैयतों से जब मारपीट और रैयतों पर दबाव बनाने की बात पूछी गई तो उन्होंने से सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ये केवल सियासी फायदे के लिए किया जा रहा है। अमरकांत चौधरी, केशव मंडल,सुबोध ठाकुर, प्रधान, गुड्डू मंडल, सुनील मंडल, निकेश कुमार यादव, महेश कांत मंडल, पंकज मंडल ने अपने विचार हमारे सामने रखे।

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