गोड्डा: अडाणी को लेकर महिलाएं क्या सोच रही हैं, कुछ बदला या सबकुछ वैसे ही है? Video

गोड्डा/झारखंड: अडाणी पावर प्रोजेक्ट की तरफ से जिन रैयतों की जमीन का अधिग्रहण किया गया उन्हें उसके बदले मुआवजा दिया गया। हाल ही में ये बात भी सामने आई थी कि कंपनी की तरफ से जबरन बिना नोटिस दिये लोगों खासकर आदिवासियों की जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। लेकिन जमीनी हकीकत ये सामने आई कि केवल दो या तीन किसान ऐसे हैं जो जमीन देने का विरोध कर रहे हैं। जबकि ज्यादा तादाद उनकी है जिन्होंने अपनी जमीन स्वेच्छा से कंपनी को दी है।

इस विरोध की हकीकत सामने आने के बाद अब ये जान लेना भी जरूरी है कि प्रभावित क्षेत्र की महिलाएं क्या सोचती हैं अडाणी के बारे में या फिर कंपनी ने महिलाओं के लिए क्या किया। क्योंकि कंपनी की तरफ से दावे काफी किये जाते रहे हैं कि सीएसआर के तहत क्षेत्र की महिलाओं के लिए काफी काम किये जा रहे हैं।

पेटवी संथाली टोला की जूली किस्कू मानती हैं कि अडाणी के आने से इलाके में बदलाव हुआ है। आदिवासी गांव में जो सुविधाएं या सुधार अबतक नहीं हुए थे उस दिशा में भी कंपनी की तरफ से काम किया जा रहा है।

कंपनी के इन्हीं कामों में शामिल है ‘सक्षम’ जैसे सेंटर। जहां महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें प्रशिक्षित किया जाता है। यहां सिलाई कढ़ाई और कंप्यूटर के बारे में जानकारी दी जाती है। जिससे वो प्रशिक्षण लेकर खुद को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ भी रही हैं।

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