अडाणी-आदिवासी विवाद और विरोध में आदिवासी मोहरा तो नहीं बन गए?

गोड्डा/झारखंड:  माली मौजा में अडाणी के अधिकारियों और आदिवासियों के बीच हुए विवाद के बाद इस सवाल का जवाब हर कोई जानना चाहता है कि क्या आदिवासी खौफ और डर के साये में जी रहे हैं। यहां ये जानना भी जरुरी है कि धरातल पर जिस विरोध का दावा किया जा रहा है उसकी गहराई कितनी है।

ग्रामीण संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नारायण मंडल के मुताबिक जो विरोध किया जा रहा है वो निराधार है। इस मामले पर नयाबाद, पेटवी और माली बसंतपुर में अलग अलग तीन बैठक की गई। जिसमें रैयत और गैर रैयत दोनों शामिल हुए। इन्हीं बैठकों में वो आदिवासी भी शामिल हुए जिनकी जमीन तो अडाणी पावर प्रोजेक्ट के लिए नहीं ली गई थी लेकिन कंपनी से उन्हें फायदा काफी मिला।

नारायण मंडल ने कहा कि जो विरोध की बात की जा रही है वो गैरवाजिब है। जहां तक फसल के नुकसान की बात है तो कंपनी उसकी भरपाई के लिए तैयार है। ग्रामीण संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष ने ये भी कहा कि अगर किसी को शिकायत है तो उनके साथ बैठक कर विवाद को सुलझा लिया जाएगा।

कंपनी की तरफ से धमकी या डराने धमकाने के दावे पर आदिवासियों का भी कहना है कि कंपनी की तरफ से उन्हें कभी किसी तरह की धमकी या कभी किसी तरह का दबाव उनपर नहीं बनाया गया। लेकिन ये बात उन्होंने जरुर स्वीकार किया कि कंपनी के आने से उन्हें कुछ जरुरी सुविधाएं जरुर मिल गईं।

इसे भी पढ़ें
अडाणी पर भ्रम फैला रहे हैं प्रदीप, आदिवासियों को फसल-वृक्ष के बदले मिलेगा मुआवजा – प्रशांत

(Visited 61 times, 1 visits today)
loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *