गोड्डा: अडाणी से जमीन के बदले मुआवजा मिला, जिनकी जमीन नहीं ली गई उन्हें क्या मिला?

गोड्डा/झारखंड:  गोड्डा में एक तरफ वो रैयत हैं जिनकी जमीन अडाणी पावर प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहण की गई। दूसरी तरफ वो गैर रैयत हैं जिनकी जमीन का अधिग्रहण नहीं किया गया है। इन दोनों गांव के बीच फासला चंद किलोमीटर है। लेकिन रैयत और गैर रेयत की जिंदगी में जो बदलाव हुए हैं वो काफी ज्यादा है। लेकिन कंपनी इन रैयत और गैर रैयत लगों के बारे में क्या सोच रखती है ये अपने आप में बड़ा सवाल है।

क्योंकि जो गैर रैयत हैं कभी उनकी जमीन के अधिग्रहण की बात भी की जा रही थी। लेकिन आम राय नहीं बन पाने की वजह से कंपनी ने उन गांवों में जमीन अधिग्रहण को टाल दिया गया। गैर रैयतों की जमीन का अधिग्रहण भले ही नहीं किया गया लेकिन अडाणी की मौजूदगी के साक्ष्य गांव में जरुर दिखाई दे जाते हैं।

इन गांव में अडाणी का नाम तो पहुंचा लेकिन उन गांवों में जमीन का अधिग्रहण नहीं किया गया। लोगों को इसका अफसोस जरुर है लेकिन शिकायत नहीं, क्योंकि जमीन भले ही नहीं ली गई लेकिन भलाई के काम जरुर किये हैं। इन गांवों में कंपनी की तरफ से चापाकल पर महिलाओं के नहाने के लिए बाथरुम से लेकर सिंचाई की समस्या को दूर करने के लिए तालाब का जीर्णोद्धार कंपनी की तरफ से कराया जा रहा है।

यानि ये गैर रैयत वो हैं जिनकी जमीन तो कंपनी के प्रोजेक्ट के लिए नहीं ली गई लेकिन उनके गांव में लोगों की सुविधा के लिए कंपनी ने काम जरुर किया। बक्सरा पंचायत सिमिति के सदस्य रमन कुमार भी ये मानते हैं कि कंपनी को भले उनके गांव से कोई फायदा नहीं हुआ लेकिन उनके गांव को कंपनी से काफी फायदा मिला है। वो भी तब जब उनके पंचायत की जमीन भी नहीं ली गई। अरुण कुमार मंडल, रंजीत कुमार साहा, महेश प्रसाद मंडल, घनश्याम मंडल, संतोष कुमार, नरेंद्र कुमार, पीतांबर कुमार मंडल जैसे लोग भी मानते हैं कि कंपनी की तरफ से बिना जमीन लिये जो काम गांव किये जा रहे हैं उससे फायदा स्थानीय निवासियों का ही हुआ है।

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