दुमका: चार दिन में मिला इंसाफ, गैंगरेप के तीन दोषियों को फांसी की सजा

दुमका/झारखंड:  गैंगरेप के एक मामले में अदालत का इंसाफ एक नजीर साबित हुआ है। दुमका की अदालत में गैंगरेप के तीन आरोपियों को चार दिन की सुनवाई के बाद फांसी की सजा सुनाई गई है। गैंगरेप की ये वारदात 5 फरवरी की है। जब रामगढ़ में 6 साल की बच्ची को उसी के चाचा और उसके साथियों ने हवस का शिकार बनाया था। और बच्ची के साथ गैंगरेप के बाद उसकी हत्या कर शव को दफना दिया था।

इस मामले में 16 गवाहों के बयान दर्ज किये गए। पुलिस ने 25 फरवरी को अदालत में चार्जशीट दाखिल किया था। जिसके बाद अदालत ने इस मामले में सुनवाई शुरु की। इस मामले की सुनवाई देर रात तक की गई। जिसके बाद मंगलवार को यानि चौथे दिन अदालत ने लड़की के चाचा मिट्ठू राय समेत तीनों आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई।

कैसे दिया वारदात को अंजाम?

5 फरवरी 2020 को बच्ची सरस्वती पूजा के मौके पर लगनेवाले मेला देखने के लिए रामगढ़ अपने ननिहाल आई थी। उसी दिन शाम को बच्ची का चाचा उसे मेला दिखाने के बहाने अपने साथ ले गया। मेला देखकर वापस आते वक्त बच्ची के चाचा और उसके दोनों साथियों ने उसके साथ गैंगरेप किया। बच्ची घर पहुंचकर किसी इनकी करतूत के बारे में ना बता दे इसलिए तीनों ने मिलकर उसकी हत्या कर दी और शव को झाड़ी में दफना दिया। इस कुकर्म के बाद तीनों घर वापस लौट गए।

बच्ची जब घर नहीं पहुंची तो परिजन पुलिस के पास पहुंचे। 7 फरवरी को पुलिस ने बच्ची का शव बरामद किया। इस वारदात का मास्टरमाइंड लड़की का चाचा मिट्ठू राय ही था। लेकिन वारदात के बाद वो घऱ वापस लौट आया था और जब पुलिस ने बच्ची की खोजबीन शुरु की तो वो भी साथ था। इसी दौरान रामगढ़ के मोहबाना गांव के चौराहे पर बच्ची की चप्पल मिली। और थोड़ी ही दूरी पर उसका शव बरामद किया गया था।

अबतक की जांच में पुलिस की शक की सूई मिट्ठू राय की तरफ घूम चुकी थी। जिसके बाद वो मुंबई फरार हो गया। जिसे बाद में मुंबई पुलिस की मदद से गिरफ्तार किया गया। उसकी निशानदेही पर मामले के दो और आरोपी पंकज राय और अशोक राय को गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट से गिरफ्तार किया गया।

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